समस्या का समाधान तलाशने अनोखे अंदाज में साइकिल पे निकली देश की दो बेटियां

Medhaj news 16 Jun 18,22:22:47 TV Tadka
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माना कि वो लड़कियां हैं लेकिन उनका जज्बा लौह सरीखा है। संदेश हैं कई, समस्याओं के अंबार भी हैं कई लेकिन हल तलाशने का उनका अंदाज अनोखा है। देश की दो बेटियां मातृभूमि, नारी सशक्तिकरण, पर्यावरण संरक्षण और बेटियों की रक्षा के लिए गोल्डन क्वार्डीलेटरल ऑन बाइसिकिल के अंतर्गत पुणे से साइकिल पर निकली हुई हैं।
पुणे निवासी वैष्णवी विजय भुजबल और उत्कर्षा पुणे से 7000 किमी की साइकिलिंग का ध्येय लेकर शुक्रवार को आगरा पहुंचीं। यहां आगरा साइकिलिस्ट गु्रप के सदस्यों ने उनका स्वागत किया। दोनों साइकिलिस्ट ने ताज महल का दीदार किया और अपने उद्देश्य के संदेशों को ताजनगरी के लोगों के साथ साझा किया।
 वैष्णवी और उत्कर्षा पुणे से चैन्नई, कोलकाता, दिल्ली, मुंबई होते हुए वापस पुणे पहुंचेंगी।

ताजनगरी में उन्होंने करीब 37 किमी की राइड की। वे दिल्ली से आगरा पहुंची थीं।

दोनों साइकिलिस्ट का कहना था कि लोग सोचते हैं कि बेटियां कमजोर होती हैं। उनके लिए समाज में सुरक्षित माहौल नहीं है लेकिन इससे इतर हम हजारों किमी का सफर बिना किसी डर के तय कर रही हैं। वहीं पर्यावरण संरक्षण पर उनका कहना था कि मौसम का बदलाव चेतावनी दे रहा है। ईधन का प्रयोग बढ़ने से लगातार प्रदूषण में बढ़ोत्तरी हो रही है। बावजूद इसके लोग परिस्थितियों को समझने की जगह सिर्फ चर्चाएं कर रहे हैं। उन्होंने साइकिल को प्रदूषण रोकने का सबसे अच्छा माध्यम बताया।

देश की दोनों बेटियों के जज्बे को ताजनगरी ने भी सलाम किया। शहर में जब दोनों साइकिलिस्ट अपने संदेश का प्रचार कर रही थीं तो लोगों ने उनके प्रयास की सराहना भी की। 

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