लाशों के बीच दिखा अजब नज़ारा, शवों के साथ सजी संगीत की महफिल!

मेधज न्यूज 4 Apr 17 , 06:01:37 Ajab Gajab
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मोक्ष की नगरी वाराणसी स्थित मणिकार्णिका घाट पर यूं तो सारा साल गमगीन माहौल होता है, लेकिन सोमवार की रात यहां गम नहीं बल्कि नृत्य और संगीत का खुशनुमा माहौल होता है। दरअसल, सोमवार को शिव के प्रिय महाश्मशान में श्मशाननाथ वार्षिक श्रृंगार महोत्सव के दौरान हर साल की तरह इस साल भी नगर वधुंओं ने नृत्य प्रस्तुत किया।  

सालों पुरानी इस परंपरा को जीवित रखते हुए जहां नगर वधुओं ने नृत्य प्रस्तुत कर बाबा को अपनी श्रद्धा समर्पित की, तो वहीं फेमस सेमी क्लासिकल सिंगर पद्मश्री डॉ सोमा घोष ने मधुर स्वर की चाशनी में लिपटे बोलों को बाबा चरणों में अर्पित कर उनका साथ दिया। कार्यक्रम में डॉ सोमा घोष की उपस्थिति ने इस बात का संदेश दिया कि समय ने रुढि़यों को बदला है और वर्जनाओं को तोड़ा है। इसके साथ ही 350 सालों में पहली बार कोई DM अपनी पत्नी के साथ प्रोग्राम में शामिल हुआ।

नगर वधुओं के बीच पहुंचे DM योगेश्वर राम ने कहा, मैं यहां अद्भुत संगीत और नृत्य समारोह देखने आया हुं। मैने और मेरी पत्नी ने कई बार  संगीत की साधना और जन्म से मुक्ति के लिए नगर वधुएं नृत्य करती हैं। हमने समाज की भ्रान्ति को तोड़ा है कि संगीत की साधना भजन और स्तुति से जलती चिताओं के सामने भी होती है, बस मन स्वच्छ होना चाहिए।''

पद्मश्री डॉ सोमा घोष ने कहा कि दुनिया में उन्होंने कई प्रोग्राम किए लेकिन यहां पर गायन से उन्हें अंदरूनी ऊर्जा का संचार हुआ है। आगे वह बोली, ‘नगर वधुओं को आज हमारा समाज स्वीकार नहीं करता, जबकि उन्होंने ब्रिटिश और मुगलों से लड़ते हुए हमारे संगीत को बचाया है।’

बता दें,  नवरात्र के सप्तमी के दिन अनूठी परंपरा में नगर वधुएं चिताओं के सामने नाचती हैं।

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