यमराज से एक मीटिंग के लिए आए हिमाचल के इस मंदिर...

मेधज न्यूज 9 Jan 17,21:55:46 Ajab Gajab
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हिमाचल के चम्बा जिले में भरमौर नामक स्थान में स्थित इस मंदिर के बारे में कुछ बड़ी अनोखी मान्यताएं प्रचलित है। माना जाता है यहां मरने के बाद हर किसी को आना पड़ता है। चाहें वह आस्तिक हो या नास्तिक।

यह मंदिर घर की तरह दिखाई देता है, हिमाचल के इस मंदिर में बहुत से लोग प्रवेश करने का साहस नहीं जुटा पाते। बहुत से लोग मंदिर को बाहर से प्रणाम करके चले जाते हैं। इसका कारण यह है कि इस मंदिर में यमराज रहते हैं, संसार में यह इकलौता मंदिर है जो यमराज को समर्पित है।

इस मंदिर में एक खाली कमरा है... जिसे चित्रगुप्त का कमरा माना जाता है। चित्रगुप्त यमराज के सचिव होते हैं, जो जीवात्मा के कर्मों का लेखा-जोखा रखते हैं। मान्यता है कि जब किसी प्राणी की मृत्यु होती है तब यमराज के दूत उस व्यक्ति की आत्मा को पकड़कर सबसे पहले इस मंदिर में चित्रगुप्त के सामने प्रस्तुत करते हैं।

चित्रगुप्त जीवात्मा को उनके कर्मों का पूरा ब्योरा देते हैं इसके बाद चित्रगुप्त के सामने के कक्ष में आत्मा को ले जाया जाता है। इस कमरे को यमराज की कचहरी कहा जाता है। कहा जाता है कि यहां पर यमराज कर्मों के अनुसार आत्मा को अपना फैसला सुनाते हैं।

यह भी मान्यता है इस मंदिर में चार अदृश्य द्वार हैं, जो स्वर्ण, रजत, तांबा और लोहे के बने हैं। यमराज का फैसला आने के बाद यमदूत आत्मा को कर्मों के अनुसार इन्हीं द्वारों से स्वर्ग या नर्क में ले जाते हैं। गरूड़ पुराण में भी यमराज के दरबार में चार दिशाओं में चार द्वार का उल्लेख किया गया है।

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