जानें, 1 अप्रैल के दिन ही क्यों मनाया जाता है ‘मूर्ख दिवस’?

मेधज न्यूज 1 Apr 17 , 06:01:37 Ajab Gajab
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आज 1 अप्रैल है यानी की ‘अप्रैल फूल डे’ इस दिन हर किसी को बेवकूफ बनाया जाता है। यूं तो हंसी–मजाक हम अक्सर करते ही रहते हैं, लेकिन यह लोगों को बुद्धू मनाने का एक सबसे स्पेशल दिन है। इस दिन किसी को मुर्ख बनाते हैं, तो कोई गुस्सा नहीं होता लेकिन यदि किस और दिन किसी को मुर्ख बनाया जाए, तो शायद वे आपसे नराज हो जाए या फिर गुस्सा हो जाए।

इस दिन दोस्तों, परिजनों, शिक्षकों, पड़ोसियों, सहकर्मियों आदि के साथ अनेक प्रकार की शरारतपूर्ण हरकतें और अन्य व्यावहारिक मजाक किए जाते हैं, जिनका उद्देश्य होता है बेवकूफ और अनाड़ी लोगों को शर्मिंदा करना।

पारंपरिक तौर पर कुछ देशों जैसे न्यूजीलैंड, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण अफ्रीका में इस तरह के मजाक केवल दोपहर तक ही किये जाते हैं, और अगर कोई दोपहर के बाद किसी तरह की कोशिश करता है तो उसे "अप्रैल फूल" कहा जाता है।

आप हर 1 अप्रैल को लोगों को बेवकूफ बनाकर ‘मूर्ख दिवस’ मनाते हैं, लेकिन कभी आपने सोचा है कि इसकी शुरूआत कब और कैसे हुई?

अगर नहीं सोचा... तो आज जान लीजिए...

ऐसा कहा जाता है की अप्रैल फूल दिवस का सबसे पहले जिक्र 1392 में ब्रिटिश लेखक चॉसर की किताब कैंटरबरी टेल्स में मिलता है। इस किताब की एक कहानी नन्स प्रीस्ट्स टेल के मुताबिक इंग्लैण्ड के राजा रिचर्ड द्वितीय और बोहेमिया की रानी एनी की सगाई की तारीख 32 मार्च घोषित कर दी गई जिसे वहां की जनता ने सच मान लिया और मूर्ख बन बैठे। तब से 32 मार्च यानी 1 अप्रैल को अप्रैल फूल डे के रूप में मनाया जाता है।

तभी से एक अप्रैल को मूर्ख दिवस अर्थात अप्रैल फूल डे मनाया जाने लगा। वैसे तो अप्रैल फूल डे पश्चिमी सभ्यता की देन है लेकिन यह विश्व के अधिकांश देशों सहित भारत में भी मजे से मनाया जाता है। 

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