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मायावती ने कहा कि कभी-कभी देशहित में ऐसे फैसले लेने पड़ते हैं

Medhaj News 19 Apr 19 , 06:01:39 India
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मायवती ने गेस्ट हाउस कांड का जिक्र करते हुए कहा - 2 जून 1995 को हुए गेस्ट हाउस कांड के बाद भी लोकसभा चुनाव में गठबंधन का जवाब सभी चाहते होंगे | गेस्ट हाउस कांड के बाद भी सपा बसपा गठबंधन हुआ | कभी-कभी देशहित में ऐसे फैसले लेने पड़ते हैं | हम सांप्रदायिक ताकतों को रोकने के लिए एक साथ आए हैं | हमें उम्मीद है कि मुलायम सिंह जी को आप भरी मतों से जीतकर एक बार फिर संसद भेजेंगे | करीब ढाई दशक पुरानी राजनैतिक विद्वेष पर जमी धूल की मोटी परत को साफ करते हुए मायावती ने मंच से सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव की तारीफ़ भी की | उन्होंने मुलायम सिंह यादव को असली पिछड़ा बताते हुए कहा कि नरेंद्र मोदी ने अपनी सरकार में सत्ता का दुरूपयोग करते हुए खुद को पिछड़ा बना लिया | इस दौरान मायावती ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भी खूब हमला किया | उन्होंने कहा कि मुलायम ओबीसी के सबसे बड़े नेता हैं | प्रधानमंत्री तो नकली पिछड़े हैं | मायावती ने कहा कि मुलायम सिंह जी ने मैनपुरी के लिए बहुत काम किया है, उन्हें भारी वोटों से जीता देना |





दरअसल, 2 जून 1995 को राजधानी लखनऊ के मीराबाई रोड स्थित स्टेट गेस्ट हाउस में हुई घटना देश की राजनीति के लिए किसी कलंक से कम नहीं थी | उस दिन बसपा सुप्रीमो मायावती के साथ न सिर्फ मारपीट हुई बल्कि उनके कपड़े तक फाड़ दिए गए थे | मायावती के जीवन पर लिखी गई अजय बोस की किताब में ‘गेस्ट हाउस कांड’ का तफ्तीश के साथ जिक्र किया गया है | बोस की किताब ‘बहनजी’ के मुताबिक, उस दिन बसपा के विधायक मायावती को अकेला छोड़कर भाग गए थे, लेकिन बीजेपी विधायक ब्रह्मदत्त द्विवेदी ने उनकी जान बचाई थी | दरअसल, बाबरी विध्वंस के बाद 1993 में यूपी की सियासत में गठबंधन की नई पटकथा लिखी गई | सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव और बसपा अध्यक्ष कांशीराम ने बीजेपी को रोकने के लिए गठबंधन किया | जनता ने बहुमत भी दिया | मुलायम सिंह के नेतृत्व में गठबंधन की सरकार बनी | इसके बाद 2 जून 1995 को एक रैली में मायावती ने सपा से गठबंधन वापसी की घोषणा कर दी | अचानक हुई इस घोषणा से मुलायम सरकार अल्पमत में आ गई | उसके बाद राज्य सरकार के गेस्ट हाउस में सपा कार्यकर्ताओं की उन्मादी भीड़ ने जो किया, वह यूपी के सियासी इतिहास में किसी बदनुमा दाग से कम नहीं था | किताब 'बहनजी' के मुताबिक भीड़ एक दलित महिला नेता को भद्दी-भद्दी गालियां दे रही थी | यह भीड़ उनकी आबरू लूटने पर आमादा थी | उस दिन गेस्ट हाउस में क्या हुआ था, यह आज भी लोगों के लिए कौतुहल का विषय है | अजय बोस की किताब के मुताबिक, सरकार अल्पमत में आने के बाद सपा नेता बहुमत का जुगाड़ बैठाने में जुट गए | उस वक्त मायावती मीराबाई रोड स्थित गेस्ट हाउस के कमरा नंबर-1 में ठहरी हुई थीं | कहा जाता है कि बसपा विधायकों का जबरन समर्थन लेने के लिए सपा कार्यकर्ताओं की भीड़ ने गेस्ट हाउस पर हमला किया | किताब के मुताबिक गाली-गलौज करते और शोर मचाते सपा समर्थकों ने गेस्ट हाउस पर धावा बोल दिया | सपा नेताओं ने मायावती को कमरे में बंद कर उनके साथ मारपीट की | उनके कपड़े फाड़ दिए | इन सब के बीच वहां मौजूद बसपा विधायक और नेता मायावती को बचाने की जगह फरार हो गए | ऐसे में मायावती की जान बचाने के लिए बीजेपी विधायक ब्रह्मदत्त द्विवेदी पहुंचे | द्विवेदी ने दरवाजा तोड़कर मायावती को सुरक्षित बाहर निकाला |


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