केंद्र ने कोल ब्लॉकों के व्यावसायिक खनन को दी अनुमति, श्रमिक नेता करेंगे विरोध

Medhaj News 10 Nov 17 , 06:01:37 Business & Economy
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केंद्र ने निजी कंपनियों को कोल ब्लॉकों में व्यावसायिक खनन की अनुमति दे दी है, जिसकी कोयला मंत्रालय ने पूरी तैयारी कर ली है। इससे CIL ( Coal India limited) की आनुषांगिक कंपनियों की कोयला बिक्री पर असर पड़ सकता है। केंद्र के इस फैसले का श्रमिक नेताओं ने विरोध करना शुरु कर दिया है।

श्रमिक यूनियन का माना है कि इस फैसले से कोयला मजदूरों को भविष्य में दिक्कत का सामना कर पड़ेगा और हम इसका विरोध जरूर करेंगे। उन्होंने कहा कि सरकार का यह प्रयोग सफल नही हो पाएगा।

आवंटन के बाद भी नही खुले अधिकांश ब्लॉक

यूपीए सरकार ने 254 कोल ब्लॉक आवंटित किए थे। जहां निजी कंपनियों ने कोयला उत्पादन शुरू कर अपने पावर प्लांट तथा अन्य उद्योग में खपत किया। लेकिन कई कंपनी कोल ब्लॉक शुरू ही नहीं कर सके। इस बीच आवंटन को लेकर उठे विवाद के बाद सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई करते हुए निरस्त कर दिया। हालांकि बाद में कोल मंत्रालय ने बकायदा बोली लगाकर कुछ कोल ब्लॉक को आवंटित किया, पर अभी तक अधिकांश ब्लॉक नहीं खुल सके। वर्तमान में जितनी भी कंपनियों को ब्लॉक आवंटित किया गया है, उन्होंने अब तक उत्खनन का कार्य आरंभ नहीं किया है। ये कंपनियां सीआईएल की खदानों से ही कोयला उठा रही हैं।

CIL पर पडेगा असर

केंद्र के इस फैसले के बाद कोयला उत्खनन कर खुले मार्केट में बेचा जा सकेगा। वर्तमान में SECL समेत कोल इंडिया लिमिटेड की अन्य आनुषांगिक कंपनी के पास कोल स्टॉक पड़ा हुआ है। पावर प्लांट में कोयला नहीं होने के बाद भी उठाव प्रभावित है।

व्यावसायिक खनन की अनुमति निजी कंपनियों को मिलने पर CIL को काफी परेशानी झेलनी पड़ेगी। प्रतिस्पर्धा होने की स्थिति में निजी कंपनियां कोयले के दाम में गिरावट लाएंगी और CIL की कंपनियों का कोयला नहीं उठ पाएगा। इसका असर कोयला मजदूरों पर पड़ेगा। भविष्य में CIL को भी कोयले की कीमत कम करनी होगी, तब कोयला मजदूरों वेतन समेत अन्य समस्याओं से जूझने पडेगा।

मजदूर संघ कर सकता है आंदोलन

व्यावसायिक खनन की अनुमति देने पर कोयला खदान मजदूर संघ के अध्यक्ष संजय सिंह, महामंत्री टिकेश्वर सिंह राठौर तथा वेलफेयर बोर्ड मेंबर संजय शर्मा ने कड़ी आपत्ति जताई है। व्यावसायिक खनन की अनुमति मिलने पर निजी प्रबंधन मनमर्जी करने लगेगा। इन खदानों में कार्यरत मजदूरों को माइंस एक्ट के तहत न तो सुविधाएं मिलेंगी और न ही वेतन मिलेगा। कम दर पर मजदूरों से काम करा कंपनी अधिक प्रॉफिट हासिल करने का प्रयास करेगा। संघ ने केंद्र की इन नीतियों का विरोध करने का निर्णय लिया है। इस संबंध में कोयला प्रबंधन तथा कोल मंत्रालय को पत्र लिख कर आपत्ति जताई गई है। इसके बावजूद भी फैसला नही बदलता है तो मजदूर संघ आंदोलन का रास्ता अख्तियार करेगा।

 

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