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रहें स्वस्थ ताकि सर्दी का लें सकें पूरा आनन्द

Medhaj News 14 Oct 19 , 06:01:39 Business & Economy
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सुबह शाम ठंडी का असर मालूम पड़ने लगा है। ऐसे में बीमारियां भी बढ़ रही हैं। कहीं सर्दी जुकाम तो कहीं बुखार का प्रकोप बढ़ गया है। बीमारियों से बचने के लिए दिनचर्या व खान-पान में संतुलन बनाने की सलाह चिकित्सकों ने दी है। ठंडी का मौसम बुजुर्गों, सांस के मरीजों व बच्चों के लिए समस्या का कारण बन जाता है। इस बारे में विशेषज्ञ चिकित्सक डा. एमएल वर्मा ने बताया कि ऐसे तो ठंडी के मौसम में सभी को एहतियात बरतने की जरूरत होती है। लेकिन बुजुर्गों व सांस सम्बंधी बीमारियों से ग्रसित मरीजों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। ऐसे लोगों को टहलने के लिए अपने समय में परिवर्तन करना चाहिए। जब गुनगुनी धूप खिल जाए तभी बाहर निकलें।





उन्होंने कहा कि शरीर को पूरी तरह से ढकने वाले गर्म कपड़े पहने, आग सेंकने से बेहतर है कि धूप में बैठें या फिर बिस्तर पर रहें। सांस के मरीजों को धुएं से परेहज करना चाहिए। नहाने व पीने के लिए गुनगुने पानी का प्रयोग करें। साथ ही चिकित्सीय परामर्श से आवश्यक दवाएं भी अपने पास रखें। जिससे आवश्यकता पड़ने पर तत्काल उसका प्रयोग किया जा सके।



संयुक्त जिला अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सक डा. एनएन पांडेय बताते हैं कि खानपान में सावधानी रखने से ठंड के प्रकोप को कम किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि हर मौसम के लिए हमारी रसोईं ही चिकित्सक का काम करती है। रसोईं में मौजूद मसाले खासकर गरम मसाले हमारे सेहत को बेहतर रखने व ठंडी से बचाव के लिए मुफीद साबित होते हैं।





उन्होंने कहा कि हल्दी में एक विशेष प्रकार का उड़नशील तेल होता है जिसमें करक्यूपिन नामक तत्व होता है जो धमनियों में जमे कोलेस्ट्रोल को घोलता है। जिससे रक्त संचार सुचारू रूप से होता है। हल्दी विटामिन ए, प्रोटीन, कार्बोहाईड्रेट व कई लाभकारी खनिज तत्व होते है। उन्होंने कहा कि हल्दी खून को साफ व पतला करती है। साथ ही कफ को मिटाती है। इसमें एंटीसेप्टिक, एंटी बायोटिक और एंटी एलर्जिक गुण होते है।





राई की तासीर गर्म होती है इसलिए इसका प्रयोग सर्दियों में विशेष रूप से किया जाता है। इसी तरह से राई से पेट के कीड़े नष्ट होते हैं और यह पसीना लाने में सहायक होती है। लौंग में औषधि के गुण होते है। इसके एंटीसेप्टिक गुण सड़न को रोकते हैं। लौंग को मसाले का मुख्य अंग माना जाता है। ठंड में इसके सेवन से शरीर में गर्मी बनी रहती है। काली मिर्च सर्दियों में रामबाण का काम करती है। सर्दी, जुकाम, खांसी आदि होने पर इसका प्रयोग लौंग के साथ काढ़ा बनाकर किया जाता है। साथ ही मलेरिया व वायरल बुखार में इसके सेवन से आराम मिलता है। हींग पित्त प्रधान होती है। इसकी तासीर गर्म होती है।  



 


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