अगर ये करे तो आम आदमी को पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों से मिल सकती है राहत,खुलासा

Medhaj news 12 Sep 18 , 06:01:38 Business & Economy
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रुपये में लगातार जारी गिरावट तथा कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी से राज्यों को चालू वित्त वर्ष में बजट अनुमान के ऊपर 22,700 करोड़ रुपये का अप्रत्याशित कर राजस्व मिलेगा | एक रिपोर्ट में यह अनुमान लगाया गया है | रिपोर्ट में कहा गया है कि राज्य चाहें तो इसके अनुपात में आम लोगों को पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों से राहत दे सकते हैं |

एसबीआई रिसर्च के एक नोट में कहा गया है कि पेट्रोल और डीजल कीमतों में वृद्धि से राज्यों को चालू वित्त वर्ष में बजट अनुमान के ऊपर 22,700 करोड़ रुपये का अप्रत्याशित कर राजस्व मिलेगा | रिपोर्ट में कहा गया है कि कच्चे तेल की कीमत में एक डॉलर प्रति बैरल की वृद्धि से सभी प्रमुख 19 राज्यों को औसतन 1,513 करोड़ रुपये का राजस्व लाभ होता है | इसमें कहा गया है कि सबसे अधिक 3,389 करोड़ का लाभ महाराष्ट्र को मिलेगा | इसके बाद गुजरात को 2,842 करोड़ रुपये का लाभ मिलेगा | अब तक केवल पश्चिम बंगाल ने ही पेट्रोल की कीमतों में 1 रुपए प्रति लीटर की राहत देने का फैसला किया है | लेकिन दूसरे राज्य भी चाहें तो ऐसा कर सकते हैं |

रिपोर्ट में कहा गया है - हमारा अनुमान है, चूंकि राज्यों को उनके बजट अनुमानों से ज्यादा राजस्व मिलने की उम्मीद है | ऐसे में वे पेट्रोल के दाम औसत 3.20 रुपये प्रति लीटर तथा डीजल के 2.30 रुपये प्रति लीटर घटा सकते हैं | इससे उनका राजस्व का गणित भी नहीं गड़बड़ाएगा | रिपोर्ट में कहा गया है कि महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, पंजाब, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, राजस्थान तथा कर्नाटक के पास पेट्रोल का दाम तीन रुपये तथा डीजल का दाम ढाई रुपये लीटर घटाने की गुंजाइश है |

अगर पेट्रोल की क़ीमत 90 रुपए प्रति लीटर है तो इसमें आधा सरकार की तरफ़ से लगाए जाने वाले टैक्स हैं | इसमें केंद्र सरकार उत्पाद शुल्क लगाती है तो राज्य सरकारें वैट लगाती हैं |

तेल इंडस्ट्री की अर्थव्यवस्था की अच्छी समझ रखने वाले और वरिष्ठ पत्रकार परंजॉय गुहा ठाकुरता कहते हैं - ये बिल्कुल सच है कि हर साल भारत में कच्चे तेल की जितनी खपत है उसका 80 फ़ीसदी से ज़्यादा हम आयात करते हैं | ये भी सच है कि अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में कच्चे तेल की क़ीमत लगातार बढ़ रही है | इसके साथ ही भारतीय मुद्रा रुपया अमरीकी मुद्रा डॉलर की तुलना में लगातार कमज़ोर हो रहा है | मतलब हम तेल के आयात पर जो पैसे ख़र्च करते हैं वो ज़्यादा करने पड़ रहे हैं | ज़ाहिर है इसका असर देश की घरेलू अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है |

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राजधानी दिल्ली में मार्च से पेट्रोल 5.60 रुपये और डीजल 6.31 रुपये प्रति लीटर महंगा हुआ है | महाराष्ट्र में पेट्रोल 89 रुपये प्रति लीटर को पार कर गया है | महाराष्ट्र में पेट्रोल पर सबसे ऊंचा 39.12 प्रतिशत का वैट लगता है | गोवा में सबसे कम 16.66 रुपये प्रति लीटर का वैट लिया जाता है | रिपोर्ट कहती है कि यदि अन्य चीजों में बदलाव नहीं होता है तो इस अप्रत्याशित लाभ से राज्यों के वित्तीय घाटा 0.15 से 0.20 प्रतिशत नीचे आएगा |


 

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