बर्थडे स्पेशल: अमिताभ बच्चन की यह 4 फिल्में आपकी जिंदगी को देगी अहम संदेश

Manisha Rajor 11 Oct 17,16:33:46 Entertainment
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सदी के महानायक अमिताभ बच्चन आज अपना 75वां जन्मदिन मना रहे हैं। अमिताभ बच्चन का जन्म 11 अक्टूबर 1942 को उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद में हुआ। लम्बे समय से अमिताभ बच्चन सिल्वर स्क्रीन पर अपना रूतबा कायम रखे हुए हैं, शायद यही कारण है कि इतने सालों बाद भी ‘कौन बनेगा करोड़पति’ को उनसे अच्छा होस्ट आज-तक नहीं मिला और न ही शायद मिलेगा।

अमिताभ बच्चन न केवल अपनी अदाकारी से लोगों का दिल जीतते हैं बल्कि अपनी आवाज से भी वह लाखों लोगों को कायल कर देते हैं।

आज अमिताभ बच्चन के जन्मदिन के अवसर पर हम उनकी करियर की कुछ ऐसी फिल्मों के बारे में बताएंगे... जो आपको आपके जीवन में एक सीख देकर जाएगी।

यह हैं वो फिल्में-

पिंक- साल 2016 में रिलीज हुई फिल्म ‘पिंक’ देश में हर दिन लड़कियों व महिलाओं के खिलाफ होने वाली घटनाओं पर आधारित फिल्म थी, जिसमें लड़कियों के साथ होने वाली छेड़खानी पर कैसे समाज उन्हें बुरा बना देता है उसे दिखाया गया था। हालांकि, अमिताभ बच्चन का किरदार समाज को आइना दिखाता है। फिल्म से अमिताभ का डायलॉग न केवल फिल्म में बल्कि असल जिंदगी में भी बेहद सटीक बैठता।

NO means NO “अगर कोई लड़की ना कहती है तो उसका सीधा मतलब ना ही होता।”

ब्लैक- फिल्म एक ऐसी लड़की की कहानी है जो न देख सकती है, न सुन सकती है और न बोल सकती है। उसके लिए केवल एक ही रंग है ब्लैक... फिल्म में अमिताभ बच्चन उस लड़की के टीचर का किरदार निभा रहे हैं। यह एक ऐसी कहानी है कि अध्यापक और उसकी स्टूडेंट को उन्हें वो सिखाना है, जो उससे पहले उसने न देखा है न सुना है और न बोला है। अमिताभ ने टीचर का किरदार बखूबी निभाया, एक ऐसा किरदार को अपने स्टूडेंट में कमी नही तलाशता... जो उसके जीवन में आशाओं को ला सके... जो उसके जीवन में रोशनी ला सके।

बागबान- 2003 में रिलीज हुई फिल्म ‘बागबान’ हर घर की कहानी-सी लगती है। फिल्म में दिखाया है कि मां-बाप अपने बच्चों की खुशी के लिए क्या कुछ नहीं कर सकते हैं... लेकिन बच्चे अपने स्वार्थ के लिए मां-बाप को भी अलग कर सकते हैं। अमिताभ की इस फिल्म से आपको यह सीख मिलती है कि अपने मां-बाप की सेवा निस्वार्थ भाव से करें... उन्होंने आपके लिए बहुत कुछ किया है... अब बारी आपकी है।

बाबुल- साल 2006 में रिलीज हुई फिल्म ‘बाबुल’ भी पारिवारिक फिल्म है, हालांकि इस फिल्म में समाज के लिए बहुत बड़ा मैसेज छुपा है। इस फिल्म में दिखाया गया है कि जब दूसरे घर की लड़की शादी करके आपके घर आती है, तो उसको केवल अपनी बहू ही न मानें उसको अपनी बेटी माने। फिल्म में अमिताभ बच्चन रानी मुखर्जी के ससुर बनते हैं, बेटे की मौत के बाद वह अपनी बहू को दुखी नहीं देखना चाहते... बहू की खुशी के लिए अमिताभ उसकी शादी उसके दोस्त से करा देते हैं और खुद अपनी बहू का कन्यादान करते हैं। 

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