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अजय कुमार लल्लू बने यूपी कांग्रेस के अध्यक्ष

Medhaj News 8 Oct 19,17:02:44 Entertainment
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अजय कुमार लल्लू को प्रदेश की कमान सौंपकर कांग्रेस एक तीर से दो निशाने साध रही है | पहला अजय कुमार लल्लू पूर्वी उत्तर प्रदेश से आते हैं और दूसरा वह पिछड़ी कही जाने वाली कानू जाति से ताल्लुक रखते हैं | वह सामाजिक न्याय के मुद्दे पर मुखर भी हैं और यूपी में हर मसले को उठाने को लेकर तत्पर रहते हैं | इसीलिए अजय कुमार लल्लू को उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष की कमान सौंपी गई है | अजय कुमार लल्लू कांग्रेस के पूर्वी यूपी के कार्यकारी अध्यक्ष भी हैं | वे कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा के बेहद करीबी माने जाते हैं | वे प्रियंका गांधी के हर यूपी दौरे में साथ नजर आते हैं | अजय कुमार लल्लू को लेकर एक वाकया अक्सर सुनाया जाता है | साल 2007 में कुशीनगर के आजादनगर कस्बे में एक नौजवान निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर भाषण दे रहा था | एक जोशीला भाषण | तभी पीछे से एक बुजुर्ग की आवाज़ आई, 'ई बार त ना, पर अगली बार बेटा विधायक बनबे | ' मतलब इस बार तो नहीं लेकिन अगली बार जरूर विधायक बनोगे | जब चुनाव का नतीजा आया तो नौजावन निर्दलीय उम्मीदवार कुछ हज़ार वोटों पर सिमट गया | हारा हुआ नौजवान कोई और नहीं, अजय कुमार लल्लू थे |





एक स्थानीय कालेज के छात्र संघ अध्यक्ष. अजय कुमार लल्लू की खासियत यह रही कि हमेशा से जमीनी आंदोलनों में बेहद सक्रिय रहे हैं | लिहाजा इन्हीं संघर्षों के चलते उन्हें हर मुद्दे पर पुलिसिया सख्ती का सामना करना पड़ा. हर बार उन पर लाठियां बरसीं | संघर्ष के प्रति अजय कुमार शुरुआती दिनों में इतने प्रतिबद्ध रहे कि लोग उन्हें 'धरना कुमार' कहने लगे | चुनाव हारने के बाद आजीविका चलाने के लिए अजय कुमार लल्लू बतौर मजदूर दिल्ली आए | संघर्ष के दिनों में उन्होंने दिहाड़ी मजदूर के तर्ज पर काम किया | मजदूरी के दौरान भी न तो उनसे क्षेत्र छूटा, न क्षेत्रीय लोग | फोन पर ही लोगों के साथ उनका संबंध बना रहा | अजय कुमार लल्लू फिर से कुशीनगर लौट आए | लल्लू फिर से कुशीनगर की सड़कों पर संघर्ष करने लगे | फिर एक दिन विधानसभा के चुनाव में कांग्रेस ने भी अजय कुमार लल्लू पर भरोसा जताया और उन्हें टिकट दे दिया | एक बुजुर्ग की पांच साल पुरानी भविष्यवाणी सच साबित हुई और एक मजदूर, एक संघर्ष करने वाला नौजवान तमकुहीराज विधानसभा से विधायक चुना गया | अजय, साल 2012 में पहली बार विधायक चुने गए थे तब उन्होंने भाजपा के नंद किशोर मिश्रा को 5860 वोटों से हराया था, लेकिन दिनों दिन उनकी लोकप्रियता बढ़ती रही | 2017 के भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की प्रचंड लहर में भी तमकुहीराज की जनता ने फिर से अपने धरना कुमार को चुना | 2017 के बीजेपी लहर में भी उन्होंने न सिर्फ अपनी सीट बचाये रखी बल्कि 2012 से ज्यादा बड़े अंतर से उन्होंने भाजपा के प्रत्याशी को हराया |


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