सुप्रीम कोर्ट ने किससे पूछा कि, शराब की होम डिलिवरी क्यों नहीं करते?

medhaj news 8 Dec 16 , 06:01:36 Governance
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बुधवार को जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय राजमार्गों और प्रदेश राजमार्गों पर खुली शराब की दुकानों को लेकर केंद्र सरकार की नीति पर अमल न करने को लेकर राज्य सरकारों का जमकर फटकार लगाई है। सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब और पुडुचेरी स्थित माहे प्रशासन पर भी तल्ख टिप्पणी की।

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार की नीति को सही ठहराते हुए कहा कि वह देश भर के हाईवे से शराब की दुकानों को हटाने के भी आदेश दे सकती है।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि, राज्य सरकारें शराब का लाइसेंस देकर पैसा बनाने में लगी हुई हैं। लेकिन वे लोगों की जिंदगी और सुरक्षा जैसी अहम बातों को दरकिनार कर रहे हैं।

तो शराब की होम डिलिवरी क्यों नहीं करते?

सुनवाई के दौरान जम्मू-कश्मीर के शराब विक्रेताओं ने दलील दी कि जो शराब पीकर गाड़ी चलाते हैं, वे शराब विक्रेता नहीं होते हैं। इस पर कटाक्ष करते हुए मुख्यन्यायाधीश टीएम ठाकुर ने कहा कि, अगर आपको इतनी ही चिंता है कि लोग शराब पीकर हंगामा करते हैं, तो फिर आप शराब की होम डिलिवरी क्यों नहीं कर देते।   

सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कई बार जिक्र किया कि अदालत यह सुनिश्चित करेगी कि हाईवे पर शराब पीकर गाड़ी चलाने की बुरी आदत को खत्म की जाए।

शराब कारोबारियों की दलील

पुडुचेरी, पंजाब और हरियाणा के शराब व्यापारी संगठन की ओर से पेश हुए वकील ने कहा कि अगर कोर्ट अचानक शराब की दुकानों को बेद करने का फैसला लेती है तो शराब व्यापारियों की काफी नुकसान होगा।

सुप्रीम कोर्ट उस वक्त हैरान हो गया जब उसे पता चला कि पुडुचेरी के माहे से होकर गुजरने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग पर 1 किमी की दूरी में ही 64 शराब के ठेके हैं। जबकि माहे की कुल आबादी 42,000 है।

 

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