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Basant Panchami 2020: जानिए क्यों मनाई जाती है वसंत पंचमी, क्या है इस पर्व का महत्त्व

Medhaj News 28 Jan 20 , 06:01:40 India
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यह पावन पर्व मां सरस्वती को समर्पित है। माता सरस्वती को बुद्धि और विद्या की देवी माना जाता है। वसंत पंचमी का पर्व बसंत ऋतु में पड़ता है। इस ऋतु में मौसम काफी सुहावना हो जाता है। इस दौरान न तो ज्यादा ही गर्मी होती है और न ही ज्यादा ठंड होती है और यही वजह है कि बसंत ऋतु को ऋतुओं का राजा कहा जाता है। वसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती की खास पूजा की जाती है। आज हम जानेंगे कि यह पूजा कब से शुरु हुई। वसंत पंचमी को लेकर पौराणिक शास्त्रों में क्या कहा गया है। आइए जानते हैं इस बारे में विस्तार से यहां…

वसंत पंचमी 2020 पूजा मुहूर्त

29 जनवरी 2020 बुधवार को सुबह 10:47:38 से दोपहर 12:34:23 बजे तक

मुहूर्त की समयाधि :1 घंटे 46 मिनट

वसंत पंचमी का दिन– ज्योतिष के मुताबिक वसंत पंचमी का दिन अबूझ मुहर्त के तौर पर जाना जाता है और यही कारण है कि नए काम की शुरुआत के लिए सबसे अच्छा दिन माना जाता है। वसंत पंचमी के दिन पीले रंग का ज्यादा महत्त्व है। इस दिन पिले वस्त्र पहनकर पूजा करना, पीले पकवान बनाना अच्छा माना जाता है।





जानिए क्यों मनाई जाती है वसंत पंचमी–

हिंदु पौराणिक कथाओं में प्रचलित एक कथा के अनुसार, भगवान ब्रह्मा ने संसार की रचना की। उन्होंने पेड़-पौधे, जीव-जन्तु और मनुष्य बनाए, लेकिन उन्हें लगा कि उनकी रचना में कुछ कमी रह गई। इसीलिए ब्रह्मा जी ने अपने कमंडल से जल छिड़का, जिससे चार हाथों वाली एक सुंदर स्त्री प्रकट हुई।

उस स्त्री के एक हाथ में वीणा, दूसरे में पुस्तक, तीसरे में माला और चौथा हाथ वर मुद्रा में था। ब्रह्मा जी ने इस सुंदर देवी से वीणा बजाने को कहा। जैसे वीणा बजी ब्रह्मा जी की बनाई हर चीज़ में स्वर आ गया। तभी ब्रह्मा जी ने उस देवी को वाणी की देवी सरस्वती नाम दिया। वह दिन वसंत पंचमी का था। इसी वजह से हर साल वसंत पंचमी के दिन देवी सरस्वती का जन्मदिन मनाया जाने लगा और उनकी पूजा की जाने लगी।

कैसे करें मां सरस्वती की पूजा–

स्कूलों और शिक्षण संस्थानों में मां सरस्वती की पूजा के साथ-साथ घरों में भी यह पूजा की जाती है। अगर आप घर में मां सरस्वती की पूजा कर रहे हैं तो इन बातों का ध्यान जरूर रखें। सुबह-सुबह नहाकर मां सरस्वती को पीले फूल अर्पित करें।

इसके बाद पूजा के समय मां सरस्वती की वंदना करें। पूजा स्थान पर वाद्य यंत्र और किताबें रखें और बच्चों को भी पूजा स्थल पर बैठाएं। बच्चों को तोहफे में पुस्तक दें। इस दिन पीले चावल या पीले रंग का भोजन करें।


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