चीन कर रहा अरुणाचल प्रदेश की सीमा पर सोने की खुदाई, बढ़ सकता है तनाव

Medhaj news 21 May 18 , 06:01:38 India
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अरुणाचल प्रदेश से छूने वाली भारतीय सीमा के नजदीक चीन अपने क्षेत्र में बड़े पैमाने पर खनन कार्य कर रहा है। पता चला है कि वहां पर चीन को सोने, चांदी और अन्य कीमती धातुओं के भंडार मिले हैं। इनकी कीमत 60 अरब डॉलर (चार लाख करोड़ रुपये) हो सकती है।  जिससे दोनों देशों के बीच एक बार फिर तनाव बढ़ने की आशंका है। खनन को लेकर चीन ने तर्क दिया है कि इस क्षेत्र में सोना, चांदी समेत कई कीमती खनिजों का भंडार होने का पता चला है जिसकी कीमत करीब 60 अरब डॉलर आंकी गई है। गौरतलब है कि चीन के इस काम से दोनों देशों में एक बार फिर तनाव बढ़ने की आशंका दिखाई दे रही है। बीते महीने ही चीन जाकर पीएम मोदी ने राष्ट्रपति शी जनिपिंग से मुलाकात की थी और डोकलाम सीमा विवाद के बाद तनाव कम करने पर जोर दिया था। दोनों देश के बीच इसपर सहमति भी बनी थी लेकिन चीन के इस कदम से एक बार फिर आशंका जताई जा रही है कि दोनों देशों की सेना आमने-सामने आ सकती हैं।
चीनी अखबार साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक अरुणाचल प्रदेश से सटे भारतीय सीमा के पास चीन के लुंझ काउंटी में माइन प्रॉजेक्ट चल रहा है। गौरतलब है कि चीन अरुणाचल प्रदेश को दक्षिणी तिब्बत बताकर उसपर अपना झूठा दावा करता रहा है। ऐसे में सीमा से सटे इलाके में खनन से दोनों देशों की सेना के बीच तनाव बढ़ सकता है। साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की रिपोर्ट में इसे चीन के अरुणाचल प्रदेश को अपने कब्जे में लेने की कोशिश और रणनीति के तौर पर बताया गया है। चीन के इस योजना पर नजर रखने वाले विशेषज्ञों का मानना है कि इस इलाके में खनन चीन के एक महत्वाकांझी योजना का हिस्सा है जिससे तिब्बत पर उसका दावा मजबूत हो सके। गौरतलब है कि सिक्किम के डोकलाम में सीमा विवाद को लेकर भारत और चीन की सेनाएं आमने-सामने आ गई थीं। 73 दिनों तक चले गतिरोध के बाद विवाद सुलझ पाया था।
दक्षिण चीन सागर के नीचे भी तेल और गैस के बड़े भंडार हैं। चीन जिस इलाके में खनन कार्य कर रहा है, वह दुनिया के सबसे ऊंचे इलाकों में से एक है। वहां प्राकृतिक चुनौतियां बेहद जटिल हैं। वहां पहुंचना जितना मुश्किल है, उससे ज्यादा मुश्किल वहां टिके रहना है। अरुणाचल सीमा पर यह स्थिति राष्ट्रपति शी चिनफिंग और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अनौपचारिक मुलाकात के कुछ ही हफ्तों के बाद बनी है। इस मुलाकात में दोनों देशों के बीच तनाव को कम करने पर सहमति बनी थी। 2017 में डोकलाम में 73 दिनों तक दोनों देशों की सेनाएं आमने-सामने डटी रही थीं और युद्ध की तैयारी जैसे हालात बन गए थे।

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