BSF जवान के बाद CRPF के जवान ने उठाए व्यवस्था और सुविधाओं पर सवाल.... देखें वीडियो!

Rajat Tripathi  |  India  |  12 Jan 17,11:29:11  |  
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इन दिनों सेना के जवान सेना में मिल रही सुविधाओं के खिलाफ मोर्चा खोले हुए हैं। ऐसे में CRPF के जवान जीत सिंह ने सीआरपीएफ के साथ हो रहे भेदभाव को लेकर एक वीडियो शेयर किया है। जवान जीत सिंह ने बताया है कि, सीआरपीएफ के जवान किस तरह देश सेवा में निरंतर लगे रहते हैं, फिर भी उनकी सुविधाएं न के बराबर होती हैं। इस बात को लेकर कॉन्टेबल जीत सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से गुजारिश की है कि, सीआरपीएफ के जवानों की भी सुविधाएं बढ़ाई जाए।

कॉन्सटेबल जीत ने बताया कि, सीआरपीएफ के जवान हर तरह की ड्यूटी करते हैं। उन्होंने कहा कि, वे लोकसभा चुनाव, राज्यसभा चुनाव यहां तक की ग्रामीण स्तर के चुनावों में ड्यूटी करते हैं। इसके अलावा वीआईपी सिक्योरिटी, संसद भवन, एयरपोर्ट, मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारे समेत कोई ऐसी जगह नहीं होती जहां सीआरपीएफ के जवानों की ड्यूटी नहीं लगती है। इसके अलावा घने जंगलों में नक्सलियों के खिलाफ भी सीआरपीएफ जवानों की ही तैनाती होती है।

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सुविधाओं के काफी असमानता

जीत सिंह ने कहा कि, इतना सब करने के बाद भारतीय सेना और बाकी अर्धसैनिक बलों के सुविधाओं में काफी अंतर है। जवान ने पीएम मोदी ने भावुकता पूर्ण निवेदन किया कि, देश के सरकारी स्कूलों में न जाने कितने टीचर हैं, जिन्हें 50,000 रूपए तनख्वाह मिलती है। उन्हें सभी त्यौहारों पर छुट्टियां भी मिलती है। जबकि हम लोग छत्तीसगढ़ और झारखंड के जंगलों में तो कोई जम्मू-कश्मीर की पहाड़ियों में पड़े रहते हैं। न तो हमें वेलफेयर मिलती है औऱ न ही वक्त पर छुट्टियां मिलती हैं। जीत ने कहा कि, उनके इस दुख को कोई समझने वाला नहीं है।

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कॉन्टेबल जीत ने सवाल किया कि, इतनी ड्यूटियां करने के बाद क्या उनका सुविधाओं पर हक नहीं है। उन्होंने कहा कि, आर्मी को पेंशन भी मिलती है, जबकि उनके पेंशन भी खत्म कर दिए गए हैं। उन्होंने व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि, 20 साल बाद जब वे नौकरी छोड़कर जाएंगे तो वे क्या करेंगे। इसके अलावा सीआरपीएफ को कैंटिन की सुविधा नहीं, मेडिकल की सुविधा नहीं, लेकिन ड्यूटी सबसे ज्यादा हमारी। कुछ इसी तरह की बातों से जीत ने हमारे व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं।

जीत ने कहा कि, आर्मी की जितना सुविधाएं मिलती हैं, उन्हें मिलनी चाहिए, लेकिन उनके साथ भी भेदभाव नहीं होना चाहिए।

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