स्वामी सानंद के निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट कर जताया दुख

Medhaj news 12 Oct 18 , 06:01:38 India
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गंगा नदी के संरक्षण को लेकर पिछले 111 दिनों से अनशन कर रहे जाने-माने पर्यावरणविद प्रोफेसर जीडी अग्रवाल उर्फ स्वामी ज्ञानस्वरूप सानंद का गुरुवार (11 अक्टूबर) की दोपहर दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया | ऋषिकेश के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में उन्होंने आखिरी सांस ली | वह 86 वर्ष के थे | अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान ऋषिकेश को स्वामी सानंद अपना शरीर दान कर गए हैं | प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट कर प्रोफेसर जीडी अग्रवाल के निधन पर दुख व्‍यक्त किया |

वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट कर प्रोफेसर जीडी अग्रवाल के निधन पर दुख व्‍यक्त किया। ट्वीट में कहा कि शिक्षा और पर्यावरण संरक्षण, विशेषकर गंगा स्वच्छता के प्रति उनका जुनून हमेशा याद रखा जाएगा। मेरी श्रद्धांजलि।

मंगलवार को उन्हें हरिद्वार स्थित मातृसदन से लाकर एम्स मे भर्ती कराया गया था। डाक्टरों के अनुसार उनके शरीर में पोटेशियम और ग्लूकोज निचले स्तर पर आ गया था, इसकी वजह से दोपहर उन्हें हृदयघात आया। 86 वर्षीय सानंद अविवाहित थे। चूंकि, स्वामी सानंद ने एम्स ऋषिकेश को अपनी देह दान की हुई थी, लिहाजा पार्थिव शरीर को अभी एम्स में ही रखा गया है। शाम को परिजन भी यहां पहुंच गए।उधर, मातृसदन के परमाध्यक्ष स्वामी शिवानंद ने जिला प्रशासन पर सानंद की हत्या का आरोप लगाया। घोषणा की है कि नवरात्रों के बाद वह स्वयं इस आंदोलन को आगे बढ़ाएंगे। कहा कि, स्वामी सानंद की हत्या में शामिल अधिकारियों व मंत्रियों को सजा दिलाने की मांग को लेकर कठोर तपस्या (अनशन) करेंगे। उल्लेखनीय है किसात साल पहले मातृसदन के एक अन्य संत निगमानंद ने भी इसी मुद्दे पर 114 दिन के तप के बाद दम तोड़ दिया था।

आपको बता दें कि गंगा की अविरलता और निर्मलता को बनाए रखने के लिए विशेष एक्ट पास कराने की मांग को लेकर आमरण अनशन कर रहे स्वामी ज्ञान स्वरूप सानंद का गुरुवार (11 अक्टूबर) को अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान ऋषिकेश में आखिरी सांस ली | स्वामी ज्ञान स्वरूप सानंद 22 जून से गंगा के लिए कानून बनाने की मांग को लेकर अनशन पर थे | वो आईआईटी कानपुर के पूर्व प्रोफेसर भी रह चुके हैं | इनका नाम प्रो, जीडी अग्रवाल था | सांसद रमेश पोखरियाल निशंक से वार्ता विफल होने के बाद स्वामी सांनद ने मंगलवार (09 अक्टूबर) जल भी त्याग दिया था |

 

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