जिसने किया था वीरप्‍पन को ढेर, उन्हें मोदी सरकार ने घाटी भेजा आतंकियों पर नकेल कसने

medhaj news 22 Jun 18 , 06:01:38 India
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जम्‍मू कश्‍मीर में महबूबा सरकार के गिरने के बाद केंद्र सरकार ने जिन तीन वरिष्‍ठ अधिकारियों को यहां पर तैनात किया गया है उन सभी की अपनी-अपनी उपलब्धि रही है। राज्‍य में नए चीफ सेक्रेटरी बनाए गए सुब्रहम्ण्‍यम जहां वरिष्‍ठ आईएएस अधिकारी हैं तो वहीं व्‍यास को नक्‍सलियों पर नकेल कसने का माहिर माना जाता है। वहीं तीसरे अधिकारी जिन्‍हें राज्‍यपाल का दूसरा सलाहकार बनाया गया है उनका नाम है विजय कुमार। विजय कुमार वही हैं जिन्‍होंने कुख्‍यात चंदन तस्‍कर के वीरप्‍पन को ढेर कर उसके आतंक को खत्‍म किया था। वीरप्‍पन वर्षों तक कर्नाटक और तमिलनाडु की पुलिस के लिए एक सिरदर्द बना रहा था। करोड़ों खर्च करने के बाद भी सरकार उसका कुछ नहीं कर पा रही थी। उसके हाथ कई अधिकारियों के खून में रंगे हुए थे। जो कोई पुलिस का या सरकारी अधिकारी उसके हत्‍थे चढ़ जाता था वह उसकी बड़ी बेरहमी से हत्‍या कर देता था। यही वजह थी कि वीरप्‍पन के नाम का खौफ इस पूरे इलाके में था। आईपीएस अधिकारी विजय कुमार ने इसी खौफ को हमेशा के लिए मौत की नींद सुलाने का काम किया था।

कुख्यात चंदन तस्कर के नाम से आतंक का पर्याय बने वीरप्पन को ऑपरेशन कॉकून के तहत खत्म करने वाले के विजय कुमार ने अपनी किताब 'वीरप्पन: चेसिंग द ब्रिगैंड' में इस ऑपरेशन से जुड़े कई खुलासे किए थे। तमिलनाडु के विशेष कार्य बल (एसटीएफ) की टीम की अगुवाई करने वाले के विजय कुमार ने वीरप्पन द्वारा की गयी नृशंस हत्याओं और अपहरण की घटनाओं का ज़िक्र किया था। इसमें कन्नड़ अभिनेता राजकुमार को 108 दिन तक अगवा किये जाने की घटना का भी वर्णन है।

योजना बनी कि बिजनसमैन वीरप्पन के पास एक संदेशवाहक भेजेगा जो उसे बताएगा कि बंदूकों की डील श्री लंका में होगी। वही आदमी वीरप्पन को त्रिची या मदुरै के अस्पताल में ले जाएगा जहां उसकी आंखों का ऑपरेशन हो जाएगा। इसके बाद उसे श्री लंका ले जाया जाएगा। हथियारों की डील होने के बाद उसे वापस भारत लाया जाएगा। बिजनसमैन जानना चाहता था कि आखिर वह आदमी कौन होगा जो यह सब काम करेगा। एसटीएफ ने इस बारे मे उसे फिक्र न करने को कहा।इस काम के लिए तत्कालीन एसटीएफ चीफ के विजय कुमार ने सब-इंस्पेक्टर वेल्लादुरई को चुना। योजना के मुताबिक एसटीएफ ने बिजनसमैन से कहा कि वह वीरप्पन के आदमी से धर्मपुरी के नजदीक किसी चाय की दुकान पर मिले। इसके बाद उस आदमी ने एक लॉटरी टिकट के दो टुकड़े किए और एक बिजनसमैन को देते हुए कहा, 'यह अन्ना का ट्रैवल टिकट' है। यह टिकट उस आदमी के लिए था जो वीरप्पन को आंखों के ऑपरेशन के लिए अस्पताल लेकर जाएगा। यानी टिकट के दोनों टुकड़े मिलने के बाद ही वीरप्पन उस आदमी के साथ जाएगा।यही लॉटरी का आधा टिकट वीरप्पन के लिए वन-वे टिकट बन गया।एनकाउंटर वाले दिन एंबुलेंस से जा रहे वीरप्पन और उसके साथियों को तमिलनाडु के जंगल में एसटीएफ की टीम ने रास्ते में एक बड़ा ट्रक खड़ा कर रोक दिया और उसको चारों तरफ से घेर लिया। शुरुआत में विरप्पन को सरेंडर करने के लिए कहा गया, लेकिन उसने पुलिस टीम पर फायरिंग कर दी। इसके बाद कुछ समय के लिए ताबड़तोड़ गोलियां चली। इनमें से एक गोली विरप्पन के सिर को चीरती हुई निकल गई और वह वहीं पर ढ़ेर हो गया। इस ऑपरेशन में एंबुलेंस में मौजूद विरप्पन के सभी साथी मारे गए थे। वीरप्पन को पकड़ने में पुलिस को 20 साल से भी ज्यादा का समय लग गया था। इसमें करीब 130 पुलिस अधिकारियों को पकड़ने की कोशिश में लगाया गया। साथ ही 1 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा का खर्च भी किया गया।

1990 में कर्नाटक सरकार ने उसे पकड़ने के लिए एक विशेष पुलिस दस्ते का गठन किया। जल्द ही पुलिसवालों ने उसके कई आदमियों को पकड़ लिया। फरवरी, 1992 में पुलिस ने उसके प्रमुख सैन्य सहयोगी गुरुनाथन को पकड़ लिया। इसके कुछ महीनों के बाद वीरप्पन ने चामाराजानगर जिला के कोलेगल तालुक के एक पुलिस थाने पर छापा मारकर कई लोगों की हत्या कर दी और हथियार तथा गोली बारूद लूटकर ले गया। 1993 में पुलिस ने उसकी पत्नी मुत्थुलक्ष्मी को गिरफ्तार कर लिया। अपने नवजात शिशु के रोने तथा चिल्लाने से वो पुलिस की गिरफ्त में ना आ जाए इसके लिए उसने अपनी संतान की गला घोंट कर हत्या कर दी।

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