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अगर कुंवारी होकर रख रहीं हैं करवाचौथ का व्रत तो जरूर जान लें ये नियम

Medhaj News 9 Oct 19 , 06:01:39 India
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करवा चौथ का व्रत सबसे महत्वपूर्व व्रतों में से एक है। सुहाग का यह व्रत हर साल कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को किया जाता है। इस बार यह तिथि 17 अक्टूबर (गुरुवार) को पड़ रहा है | इस दिन सुहागिन महिलाएं चांद देखकर ही व्रत खोलती हैं। कई संप्रदाय ऐसे हैं, जहां कुंवारी लड़कियां भी अपने साथी के लिए व्रत रखती हैं। कुंवारी लड़कियों के लिए करवा चौथ की पूजा से संबंधित कुछ नियम हैं, जिनके प्रयोग से आप आसानी से व्रत रख सकती हैं | कुंवारी लड़कियां और ऐसी लड़कियां जिनका विवाह तय हो गया है, वे भी करवा चौथ का व्रत करती हैं। अविवाहित लड़कियों को भी व्रत का पालन सामान्य नियामनुसार ही करना होता है लेकिन व्रत में पूजा से संबंधित कुछ नियम इनके लिए बदल जाते हैं। जो इनके व्रत को विवाहित महिलाओं के व्रत से अलग करते हैं।





कुंवारी लड़कियां निराहार व्रत रह सकती हैं, उन्हें निर्जल व्रत रखने की जरूरत नहीं है। शादी के बाद वह निर्जल व्रत रखें। क्योंकि आपकी शादी नहीं हुई है इसलिए आपके लिए ना तो सरगी होगी और ना ही आप बायना निकालेंगी। कुंवारी लड़कियां केवल करवा चौथ माता, भगवान शिव और माता गौरी की पूजा करें और उनकी कथा सुनें। शास्त्रों के अनुसार, कुंवारी लड़कियों को चांद देखकर व्रत नहीं खोलना चाहिए, वह तारे देखकर व्रत का समापन कर सकती हैं। उन्हें चलनी का प्रयोग करने की भी जरूरत नहीं है। वह बिना चलनी के तारों को जल से अर्घ्य देकर पूजन करें और व्रत का परायण करें।





चांद को देखकर व्रत पूर्ण करने का नियम केवल सुहागन स्त्रियों के लिए है। इस संदर्भ में वराह पुराण में दौपदी की कथा है। करवा चौथ व्रत अविवाहित लड़कियां मनोवांछित पति की प्राप्ति के लिए करती हैं। यदि आपकी शादी तय हो गई है तब आप चांद देखकर अपने मंगेतर की फोटो देखकर व्रत खोल सकती हैं।


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