मोदी सरकार ने तीन तलाक को दी मंजूरी,तीन तलाक पर अब तीन साल जेल

Medhaj news 20 Sep 18 , 06:01:38 India
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एक साथ तीन तलाक (तलाक-ए-बिद्दत) अब अपराध होगा और इसके लिए तीन साल की सजा होगी। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को एक साथ तीन तलाक को दंडनीय अपराध बनाने के लिए अध्यादेश को मंजूरी दे दी। देर रात राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने अध्यादेश पर हस्ताक्षर कर दिए। इसके साथ ही यह कानून लागू हो गया।

केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने फैसले की जानकारी देते हुए बताया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भी तीन तलाक के मामले सामने आ रहे थे, इसलिए अध्यादेश लाने की जरूरत पड़ी। केंद्र सरकार को छह माह में इस अध्यादेश को विधेयक की शक्ल में संसद में पारित कराना होगा।प्रस्तावित कानून के दुरुपयोग की आशंकाएं दूर करते हुए सरकार ने इसमें कुछ सुरक्षा उपाय भी शामिल किए हैं, जैसे ट्रायल से पहले आरोपी के लिए जमानत का प्रावधान है। पीड़ित महिला चाहे तो समझौता भी कर सकती है। कानून मंत्री ने कांग्रेस पर हमला करते हुए कहा कि वह वोट बैंक के दबाव में राज्यसभा में लंबित तीन तलाक बिल का समर्थन नहीं कर रही है। जबकि राजनीति से इसका कोई लेना-देना नहीं है।
तीन तलाक (मुस्लिम महिला, विवाह अधिकार संरक्षण) विधेयक को लोकसभा की मंजूरी मिल चुकी है और यह राज्यसभा में लंबित है। विपक्ष इसमें कुछ संशोधन की मांग कर रहा है।

अहम प्रावधान

1. किसी भी माध्यम से तुरंत तीन तलाक अपराध माना जाएगा। तीन साल की सजा का प्रावधान।
2. पीड़ित महिला या उसके रक्त संबंधियों की शिकायत पर ही कार्रवाई। पड़ोसी या अंजान व्यक्ति की शिकायत पर नहीं।
3. अपराध की सूचना पर पुलिस तुरंत गिरफ्तारी कर सकती है।
4. तीन तलाक देने वाले पति को मजिस्ट्रेट ही जमानत दे सकते हैं।

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक बेंच ने तीन तलाक बिल को निरस्त किया था। दो जजों ने इसे असंवैधानिक कहा था, एक जज ने पाप बताया था। इसके बाद दो जजों ने इस पर संसद को कानून बनाने को कहा था। संसद में यह बिल लोकसभा से तो पास हुआ, लेकिन राज्यसभा में अटक गया। इसके बाद इसे कानूनी जामा पहनाने के लिए सरकार ने अध्यादेश का रास्ता चुना है। हालांकि 6 महीने के अंदर इस पर संसद की मुहर लगनी जरूरी है। सरकार के लिए यह फिर बड़ी चुनौती होगी।

सरकार ने अध्यादेश पर जानकारी के साथ ही सुप्रीम कोर्ट के फैसले से अब तक तीन तलाक के आंकड़े भी जारी किए। प्रसाद ने बताया कि जनवरी 2017 से 13 सितंबर 2018 तक 430 तीन तलाक की घटनाएं मिली हैं। इनमें से 229 सुप्रीम कोर्ट के जजमेंट से पहले के हैं, जबकि 201 जजमेंट के बाद के हैं। 3 तलाक के सबसे ज्यादा मामले यूपी में आए। यूपी में जनवरी 17 से पहले 126 केस आए। फैसले के बाद 120 केस सामने आए।

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केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने बताया कि यह अपराध संज्ञेय (इसमें पुलिस सीधे गिरफ्तार कर सकती है) तभी होगा, जब महिला खुद शिकायत करेगी। इसके साथ ही खून या शादी के रिश्ते वाले सदस्यों के पास भी केस दर्ज करने का अधिकार रहेगा। पड़ोसी या कोई अनजान शख्स इस मामले में केस दर्ज नहीं कर सकता है।

 

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