#BanPollution: बढ़ते प्रदूषण से नॉन स्मोकर्स भी हो रहे फेफड़ों के कैंसर का शिकार

Medhaj News 12 Oct 17 , 06:01:37 India
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आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में हर कोई अपनी सेहत को लेकर सजग है। हर कोई अपने तरीके से सेहत का ख्याल रखता है, लेकिन लगातार बढ़ते पॉल्यूशन ने हर किसी को अपनी चपेट में लिया है। जिससे कैंसर जैसी बीमारी फैलने का खतरा बढ़ रहा है। आज के समय में हर तीसरा व्यक्ति कैंसर का शिकार है, चाहे वह लंग (फेफड़े) कैंसर हो या फिर चेस्ट कैंसर।

अमूमन माना जाता है कि कैंसर के शिकार सिर्फ स्मॉकिंग करने वाले होते हैं, लेकिन बदलते समय के साथ अब नॉन स्मोकर्स भी कैंसर का शिकार हो रहे है जिसका कारण है पॉल्यूशन।

ऐसा देखा भी गया है कि अगर किसी नॉन स्मोकर्स को कैंसर का पता चलता है तो वह सबसे पहले यही सोचता है कि बिना स्मोकिंग के भी उसे कैसे कैंसर हो गया।

डॉक्टर्स की मानें, तो 20 साल पहले सिर्फ उन्हीं लोगों के फेफड़े काले दिखते थे, जो स्मोकिंग किया करते थे। लेकिन अब ज्यादातर युवाओं के गुलाबी दिखने वाले फेफड़े भी काले होने लगे है। दिल्ली का पॉल्यूशन लेवल इतना बढ़ गया है कि आज नॉन स्मोकर्स भी कैंसर का शिकार हो रहे हैं। जिसके कारण तुरंत जन्म लेने वाला बच्चा भी पॉल्यूशन में सांस ले रहा है।

‘माई राइट टू ब्रीद’ ( सांस लेना मेरा अधिकार) अभियान के दौरान,  फेफड़ों का कैंसर 90% स्मोकर्स में और 40% नॉन स्मोकर्स में पाया गया। फेफड़ों का कैंसर होने पर 5% लोग ही 5 साल तक जी पाते है। क्योंकि इसके शुरुआती लक्षण टीबी की तरह लगते है जिससे इस बीमारी की पहचान सही नहीं हो पाती और 80 से 90% मरीजों के इलाज में देरी हो जाती है।

गंगाराम अस्पताल के, डॉ. नीरज जैन का कहना है कि पॉल्यूशन के लिए सख्त कानून बनाए जाए क्योंकि दिवाली पर पटाखों से होने वाले पॉल्यूशन से सांस की बीमारी बढ़ती है। अगर समय रहते पॉल्यूशन को कंट्रोल नहीं किया गया तो इससे होने वाले नुकसान तय है।

अपोलो अस्पताल के, डॉ. अनुपम सिब्बल ने बताया कि पिछले साल पल्यूशन से लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ा था और स्कूल बंद करने तक की नौबत आ गई थी।

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