पितृ अमावस्या को पितरों का करें श्राद्ध, जानें- क्या करें और क्या नहीं

Medhaj news 8 Oct 18,17:21:47 Lifestyle
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सर्वपितृ अमावस्या इस बार 8 अक्टूबर और 9 अक्टूबर दोनों दिन मनाई जा रही है।पितृपक्ष का समापन आश्विन माह की कृष्ण अमावस्या के दिन होता है जो कि श्राद्ध का अंतिम दिन होता है यानी अमावस्या से पितृ पक्ष समाप्त हो जाएगा।पितृपक्ष के अंतिम दिन को सर्वपितृ अमावस्या कहते हैं | यह आश्विन माह की कृष्ण अमावस्या के दिन होता है | यह आखिरी दिन होता है | सर्वपितृ अमावस्या पितरों के श्राद्ध का 15वां यानी सबसे अंतिम दिन होता है |

शास्त्रों के मुताबिक, जब पितरों की देहावसान तिथि अज्ञात हो तो पितरों की शांति के लिए पितृ विसर्जन अमावस्या को श्राद्ध करने का नियम हैं |

कैसे करें तर्पण-
तांबे के पात्र में गंगाजल लें | अगर गंगाजल उपलब्ध ना हों तो शुद्ध जल भी ले सकते हैं |
उसमें गाय का कच्चा दूध और थोड़ा काला तिल डालें |
अब उस पात्र में कुशा डालकर उसे मिलाएं |
स्टील का एक अन्य पात्र (लोटा) लें और उसे अपने सामने रखें |
दक्षिणाभिमुख होकर खड़े हो जाएं |
कुशा के साथ तांबे के पात्र के जल को स्टील के लोटे में धीरे-धीरे गिराएं, ध्यान रहे कि कुशा न गिरे |
जल को गिराते समय नीचे लिखे मंत्र का उच्चारण करें |
ॐ पितृ गणाय विद्महे जगत धारिण्ये धीमहि तन्नो पितरो प्रचोदयात् |
अंत में जरूरतमंदों को खाना खिलाएं |

सर्व-पितृ अमावस्या के दिन तर्पण के बाद श्रद्धा से जरूरतमंदों को भोजन कराना चाहिए | शास्त्रों में इसका बहुत महत्व बताया गया है | परंपरा के अनुसार, श्राद्ध के बाद गाय, कौवा, अग्नि, चींटी और कुत्ते को भोजन खिलाया जाता है | इससे पितरों को शांति मिलती है और वे तृप्त होते हैं |



इस दिन किसी सात्विक और विद्वान ब्राह्मण को घर पर निमंत्रित करें और उनसे भोजन करने और आशीर्वाद देने की प्रार्थना करें | स्नान करके शुद्ध मन से भोजन बनाएं, लेकिन भोजन सात्विक होना चाहिए |

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