MOVIE REVIEW: ‘बेगम जान’ के एक-एक डायलॉग कर देंगे रोंगटे खड़े...

मेधज न्यूज  |  Movies Review  |  14 Apr 17,11:37:57  |  
begam_jaan_.jpg

बॉलीवुड में अपनी अदाकारी से लोहा मनवाने वाली अभिनेत्री की फिल्म ‘बेगम जान’ आज सिनेमाघरों में रिलीज हो गई है। यह फिल्म डायरेक्टर श्रीजीत मुखर्जी के निर्देशन में बनी बांग्ला फिल्म ‘राजकहिनी’ का हिंदी रिमेक है। यदि आप भी इस फिल्म को देखने की योजना बना रहे हैं, तो एक बार जरूर पढ़ लें इसका शॉर्ट रिव्यू।

कहानी-

फिल्म की कहानी बेगम जान (विद्या बालन) के कोठे की है, यह कोठा ऐसी जगह बना है जहां से भारत-पाकिस्तान के बंटवारे के लिए लाइन खींचनी है। इस कोठे में विद्या बालन के साथ कुछ लड़कियां रहती है। इस कोठे के बीच लाइन खिंचने के लिए अफसर बेगम जान से आग्रह करते हैं कि वह यह कोठा छोड़ दें और इसे तोड़ने दें। लेकिन बेगम जान इस आदेश को नहीं मानती। इसके बाद शुरू होती है सरकारी षड्यंत्रों और तंत्रों की कहानी। कैसे बेगम जान अपने कोठे को बचाने के लिए संघर्ष करती है, इसी की कहानी है ‘बेगम जान’। इसी के साथ फिल्म में आज के कई बड़े मुद्दों को भी दर्शाया गया है। कई ऐसे सीन्स है, जिसको देखकर पुरूषों को अपने आपको पुरूष कहने पर शर्मिंदगी महसूस होने लगेगी।

देखें या नहीं-

विद्या बालन के एक-एक डायलॉग सुनकर आपके रोंगटे खड़े हो जाएंगे। इसमें एक है “एक तवायफ के लिए क्या आजादी...लाइट बंद सब एक बराबर...” ऐसे डायलॉग आज की आजादी पर सवाल खड़े कर जाएंगे। वहीं फिल्म महिलाओं की बहादुरी को भी दर्शाती है। इसे जरूर देखना चाहिए।

इसे भी पढ़ें- MOVIE REVIEW: ‘नाम शबाना’ की हीरो-हीरोइन दोनों ही है ‘तापसी पन्नू’