वासन बाला की मूवी मर्द को दर्द नहीं होता दर्शको के लिए तोफा

Medhaj News 19 Mar 19,22:10:16 Movies Review
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होली पर रिलीज हो रही धर्मा प्रोडक्शंस की साल की पहली फिल्म केसरी खिलाड़ी कुमार के नाम से मशहूर रहे अक्षय कुमार के लिए करियर का सबसे बड़ा खेल साबित होने जा रहा है। मुंबई के सट्टा बाजार में फिल्म को लेकर साल का सबसे बड़ा सट्टा लग रहा है। चौंकाने वाली बात ये है कि सट्टा बाजार में मशहूर अभिनेत्री भाग्यश्री के बेटे अभिमन्यु की फिल्म मर्द को दर्द नहीं होता का भाव अक्षय कुमार की फिल्म से बेहतर खुला है। ओरिजनल, एक्शन, ड्रामा, कॉमेडी, एंटरटेनर | पांच शब्दों में कहें तो डायरेक्टर वासन बाला की डेब्यू फिल्म मर्द को दर्द नहीं होता इन पांच श्रेणियों को ही परिभाषित करता है | सबसे पहले रॉनी स्क्रूवाला बधाई के पात्र हैं कि उनके होम प्रोडक्शन से लगातार ऐसी एक्सपेरिमेंटल फिल्में दर्शकों के सामने आ रही हैं | एक्सपेरिमेंटल सिनेमा का मतलब है कि वे फिल्में बहुत ज्ञानवर्धक और सामाजिक मुद्दों से ही लबरेज होती हैं | उन्हें मर्द को दर्द नहीं होता को लेकर अपनी गलतफहमी नहीं रखनी चाहिए | चूंकि यकीनन वासन ने अपनी पहली ही फिल्म में कई प्रयोग किये हैं, लेकिन यह फिल्म न तो ऊबाऊ है और न ही कोई ज्ञान बघारने की कोशिश करती है | कहानी सूर्या, सूप्री, सूर्या के नाना और उनके कर्राटे मास्टर की जिंदगी के इर्द-गिर्द घूमती है | सूर्या को दर्द नहीं होता और अपनी बीमारी को ही वह किस दिलचस्प अंदाज में अपनी ताकत बनाता है और कहानी में किस तरह दिलचस्प मोड़ आते हैं | यह इस फिल्म की खूबी है |  फिल्म में एक् शन कॉमेडी लव स्टोरी भी है |  इन सबके बीच सूर्या का ब्रूस ली प्रेम और फिर कर्राटे मास्टर बनने का सपना, कहानी में दिलचस्प मोड़ लाते हैं | वासन का मुख्य किरदार सूर्या कांजिनेटियल इनसेंसिटिवीटी टू पेन नामक बीमारी से ग्रसित है, जिसमें उसे कितनी भी चोट लगने के बावजूद दर्द नहीं होता है |





फिल्म के शुरुआती कुछ दृश्यों में जिस तरह मुख्य किरदार के साथ एक के बाद एक ट्रेजेडी होती है | आप यह कयास लगा सकते हैं कि फिल्म में आगे चल कर निर्देशक मुख्य किरदार के साथ दर्शक की सहानुभूति लूटने की कोशिश करने वाला है | लेकिन कुछ दृश्यों के बाद ही निर्देशक अपना वीजन स्पष्ट कर देता है कि वह सहानुभूति के लिए फिल्म नहीं बना रहे हैं | वासन और मुकेश छाबड़ा की टीम की तारीफ इस लिहाज से भी होनी चाहिए कि मुख्य किरदारों के साथ-साथ जिन कैरेक्टर किरदारों का चयन उन्होंने किया है | वह सटीक है | राधिका और अभिमन्यु के अलावा महेश मांजरेकर और गुलशन देविया के दमदार किरदार को फिल्म में नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है | इन सभी किरदारों ने मुख्य किरदार और कहानी को खूबसूरती से सपोर्ट किया है | वासन ने एक साथ कई कहानियों और किरदारों को खूबसूरती से न सिर्फ पिरोया है, बल्कि कहानी को दर्शकों के सामने रियलिस्टिक अप्रोच के साथ प्रस्तुत किया है | फिल्म की कहानी गुलशन देविहा बगैर अधूरी है, जिन्होंने दोहरी भूमिका निभाई है | एक जो कि कराटे मास्टर हैं, लेकिन दिब्यांग है | वहीं दूसरा क्रीमनल है |  दोनों के बीच जो परिस्थितियां उत्पन्न होती है, वह आपको पूरी तरह से मनोरंजन देती है | वही महेश मांजरेकर ने भी अपने संवादों से दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया है | और अंत में बताते चलें कि अभिमन्यु, मैंने प्यार किया फेम भाग्यश्री के बेटे हैं | मगर फिल्म में उनके हुनर को देखने के बाद उन्हें इस बायोडाटा की जरूरत नहीं होगी | निस्संदेह अन्य स्टार किड की तरह वह इस फिल्म में आपको डांस नंबर या बॉडी दिखाते, लव सॉंग गाते नजर नहीं आयेंगे, बल्कि अभिनय को लेकर उनकी संजीदगी आपको साफ नजर आयेगी | अभिमन्यु इस लिहाज से भी बधाई के पात्र हैं कि स्टार किड होने के बावजूद उन्होंने ऐसी प्रयोगात्मक कहानी से डेब्यू करने का निर्णय लिया | इस फिल्म को पांच में से साढ़े 3 स्टार मिलते हैं l


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