Movie Review: इमरजेंसी के दौरान ‘काले समय’ को बखुबी दिखाती है ‘इंदु सरकार’

Medhaj News 28 Jul 17,20:39:34 Ajab Gajab
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मधुर भंडारकर की फिल्म ‘इंदु सरकार’ आखिरकार आज सिनेमाघरों में रिलीज हो गई है। मधुर की यह फिल्म देश में लगे आपतकालिन काल को दर्शाती है। साल 1975 से 1977 के उस अध्याय का जुक्र किया गया है, जिसे इतिहास के पन्नों में काले धब्बे के रूप में देखा जाता है। अगर आप इस वीकेंड यह फिल्म देखने का प्लान बना रहें हैं, तो एक बार जरूर पढ़ें इसका शॉर्ट रिव्यू।

कहानी- यह कहानी आपातकाल के दौर की है, जब भारत में हर जगह हड़कंप और हाहाकार मचा हुआ था। इसी दौरान एक हकलाते हुए बात करने वाली लड़की इंदु (कीर्ति कुल्हाड़ी) की शादी सरकारी अफसर नवीन सरकार (तोता रॉय चौधरी) के साथ हो जाती है। हालांकि, दोनों के बीच में सोच को लेकर आलगाव पैदा हो जाता है। इंदु संवेदनशील होती है, उसे लोगों का दर्द अच्छा नहीं लगता। दूसरी तरफ सरकारी अफसर नवीन को सरकार का हर काम सही लगता है। इस वजह से इंदु और नवीन में बात नहीं बनती और दोनों का अलगाव हो जाता है। आपतकाल के दौरान इंदु कुछ संगठनों के साथ जुड़कर सरकार की योजनाओं का विरोध करने लगती है। कहानी में कई मोड़ आते हैं। एक पल के बाद इंदु नाना जी नाम के शख्स (अनुपम खेर) की टीम में शामिल होती जाती है। आगे क्या होता है इससे जानने के लिए आपको अपने नजदीकी सिनेमाघरों का रूख करना होगा।

देखे या नहीं- इतिहास से जुड़ी फिल्म है जोकि आपातकाल के दौरान जिस काले समय का लोगों ने सामना किया था उसे बखुबी पर्दे पर दिखाती है। इस फिल्म आपको जरूर देखना चाहिए। 

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