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उत्तराखंड के खाली होते हुए गांव को फिर से बसाने की उम्मीद जगी

Medhaj News 15 Oct 19,17:10:36 Movies Review
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राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद की पहल के बाद उत्तराखंड के खाली होते गांव के लिए विशेष प्लान बनाया गया है | उत्तराखंड के खाली होते हुए गांव को फिर से बसाने की उम्मीद जगी है | इस बार यह उम्मीद राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद की पहल पर बन रही है | उत्तराखंड पलायन आयोग और राज्य सरकार ने मिलकर ऐसे गांवों की पहचान की जहां से लोग दूसरे क्षेत्रों में पलायन कर रहे हैं | जब चीन सीमा पर बसे गांवों से पलायन हुआ तो केंद्रीय गृह मंत्रालय और राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद ने भी इस पर गंभीरता से ध्यान दिया | इसके बाद ही ऐसे क्षेत्रों की पहचान की गई जो चीन की सीमा पर स्थित हैं और जहां से लगातार पलायन हो रहा है | उत्तराखंड पलायन आयोग के अध्यक्ष डॉ एसएस नेगी कहते हैं की चीन सीमा के पास गांव से पलायन बहुत दूर नहीं हो रहा है |





इसलिए इनको वापस गांव में रोजगार उपलब्ध कराकर बसाया जा सकता है | राज्य सरकार और केंद्र के साथ मिलकर इसके लिए प्लान तैयार किया गया है | उत्तराखंड में बीजेपी सरकार बनने के बाद मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने एक सदस्य पलायन आयोग का गठन किया था | पलायन आयोग ने कई चरणों में अपनी रिपोर्ट सरकार को दी | लेकिन जब चीन सीमा से सटे हुए गांव खाली होने की रिपोर्ट सरकार के पास पहुंची तो सबके कान खड़े हो गए | इसके बाद ही उत्तरकाशी, चमोली और पिथौरागढ़ के 4 ब्लॉक में जाकर गंभीरता आंकी गई | इन तीनों जिलों की सीमा चीन से लगती है | यहां के करीब 250 गांव के लिए प्लान तैयार किया गया है | ताकि यहां के लोग रोजगार की तलाश में दूसरे शहरों में पलायन ना करें | पलायन आयोग का मानना है की इन सीमावर्ती क्षेत्रों में ही करीब 50 से 60 हजार की आबादी है |  इस आबादी के लिए रोजगार के साधन यहीं पर मुहैया कराए जाने की तैयारी है | उत्तराखंड के इस उच्च हिमालई क्षेत्र में जड़ी बूटियां और कृषि से जुड़े कई ऐसे उत्पाद हैं,  जिनकी बड़े शहरों और विदेशों में मांग है | इसी मांग को रोजगार के साथ जोड़कर आमदनी बढ़ाने की तैयारी की गई है |


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