छत्तीसगढ़: खदानों की दुर्घटनाओं पर लगेगी रोक, आस्ट्रेलियाई तकनीक से खदान की जाएगी सुरक्षा: SECL

Medhaj News 14 Nov 17 , 06:01:37 Power and Infrastructure
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देश की कोयला खदानों में बढ़ती दुर्घटनाओं को रोकने के लिए केंद्र सरकार आस्ट्रेलियाई तकनीक के इस्तेमाल की योजना बना रही है और इसके लिए कार्य भी शुरू कर दिया गया है। SECL (South eastern coalfields limited) सहित कोल इंडिया और अनुषंगी इकाइयों की कोयला खदानों को आस्ट्रेलियाई तकनीक से सुरक्षित किया जाएगा। उम्मीद लगाई जा रही है कि सुरक्षा प्रशिक्षण से सुरक्षित कोयला उत्पादन की राह आसान होगी।

ISM में दिया जाएगा तकनीकी प्रशिक्षण-

इसी कड़ी में खनन तकनीक के लिए ISM (Indian school of mines) का आस्ट्रेलिया की सिमटार्स से करार हुआ था। इसके तहत ISM में ऐसी प्रयोगशाला बनाई जा रही है, जिसमें आस्ट्रेलियाई तकनीक से खदान की स्थितियों का आभास कराया जाएगा। प्रयोगशाला में खदानों में काम करने वाले जिम्मेदार अधिकारियों को समय-समय पर बुलाकर सुरक्षित तकनीक से खनन और दुर्घटना की परिस्थितियों से निपटने का प्रशिक्षण दिया जाएगा।

आस्ट्रेलिया के खनन विशेषज्ञों की टीम इसी माह की 15 तारीख को ISM धनबाद पहुंच रही है। टीम प्रयोगशाला में वर्चुअल रियलिटी सिमुलेटर का सेटअप स्थापित करेगी। ISM के प्रोफेसर धीरज कुमार ने बताया कि खदान में रूफ वाल, साइड वाल, आग लगने एवं मोटर जलने जैसी दुर्घटनाएं होती हैं। प्रशिक्षण में बताया जाएगा कि इनसे बचाव कैसे करें और दुर्घटना की स्थिति में क्या करें, किस खदान में क्या खतरा हो सकता है और इससे बचाव के क्या उपाय हैं। यह भी बताया जाएगा कि खदान में दुर्घटना के बाद क्या किया जाना चाहिए। इसकी जानकारी प्रशिक्षण में संबंधित अधिकारियों को दी जाएगी। मुख्य बात यह है कि खदान की प्रयोगशाला में प्रशिक्षण लेने पहुंचे अधिकारियों एवं कर्मचारियों को खदान की स्थिति का आभास कराया जाएगा।

धीरज कुमार ने बताया कि वर्तमान में खदान सुरक्षा की यह तकनीक केवल आस्ट्रेलिया के पास है। इस तकनीक को हासिल कर भारत विश्व के ऐसा दूसरा देश बन जाएगा। आस्ट्रेलियाई हाई कमीशन के क्रिस एल्सटफ एवं ब्रुश मरफी ने भी ISM का दौरा किया था।

प्रयोगशाला बनाने में 12.5 करोड़ की आएगी लागत-

वर्चुअल रियलिटी सिमुलेटर सेटअप व प्रयोगशाला तैयार करने में करीब 12.5 करोड़ की राशि खर्च होगी। प्रोजेक्ट के प्रति केंद्र सरकार की गंभीरता इसी से समझी जा सकती है कि पूर्व कोयला मंत्री पीयूष गोयल टीम के साथ आस्ट्रेलिया गए थे। तभी उन्होंने ISM में सिमटार्स वैज्ञानिकों की मदद से लैब बनाने का निर्णय कर लिया था। इसके बाद दोनों देशों के अधिकारियों में बातचीत के बाद करार हो गया था। ISM में खनिज विभाग के अध्यक्ष प्रोफेसर वीएमएसआर मूर्ति, प्रोफेसर आरएन भट्टाचार्य, प्रोफेसर नीरज कुमार तथा कंप्यूटर साइंस के प्रोफेसर चिरंजीव कुमार इस प्रोजेक्ट में लगे हुए हैं।

 

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