MNRE ने सौर ऊर्जा की कटौती रोकने के लिए तमिलनाडु सरकार को लिखा खत

medhaj news 12 Oct 17 , 06:01:37 Power and Infrastructure
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नई और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) ने तमिलनाडु सरकार को लिखित में पुछा है कि वे राज्य में सौर ऊर्जा की आपूर्ति में मनमाने ढंग से कटौती या बैकडाउन क्यों कर रही है। वे उनसे इसे रोकने का आग्रह भी किया है।

18 सितंबर को लिखे गए इस पत्र में नेशनल सोलर मिशन के एडवाइजर दिलीप निगम ने तमिलनाडु के प्रिंसिपल सेक्रेटरी  विक्रम कपूर को सलाह दी है कि तमिलनाडु जनरेशन एंड डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी (TANGEDCO) के संबंधित अधिकारियों को ये निर्देश दिए जाए कि सौर ऊर्जा के प्लांट को रोकना नहीं बल्कि चलाना चाहिए।  निगम द्वारा लिखे गए इस पत्र में कहा गया है कि तमिलनाडु से सौर परियोजनाओं का समर्थन करने के संबंध में मंत्रालय को विभिन्न आवेदनकर्ताओं के प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। यह दर्शाता है कि सौर ऊर्जा डेवलपर्स को राज्य में सौर ऊर्जा क्षमता के विकास को अधिकतम करने के लिए पर्याप्त आत्मविश्वास दिया जाना चाहिए।

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पिछले साल तमिलनाडु में सोलर प्लांट दोबारा बैकडाउन के अधीन रहे हैं, इस हद तक कि भारत के राष्ट्रीय सौर ऊर्जा संघ (एनएसईएफआई) ने तमिलनाडु विद्युत नियामक आयोग के समक्ष एक याचिका दायर की है और इसे हस्तक्षेप करने के लिए कहा है। अलग से, रामनाथपुरम जिले में 216 मेगावाट सौर संयंत्र वाले अदानी ग्रीन एनर्जी ने भी इसी तरह की याचिका दायर की है।

याचिका में कहा गया था कि बैकडाउन की वजह से सोलर डेवलपर्स को भारी नुकसान होता है। इसके साथ ही बिजली उपकरणों की दक्षता में भी कमी आती है।

बैकडाउन का मुख्य कारण सौर और पवन ऊर्जा की अनिश्चित या 'कमजोर' प्रकृति बताया जा रही है, जो कि सौर की तीव्रता और हवा की गति के अनुसार भिन्न होती है। राज्य भार प्रेषण केन्द्रों को ऐसी शक्ति बंद करनी पड़ती है अगर वे ग्रिड से अधिक भार डालते हैं।

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