अक्षय ऊर्जा लक्ष्य को प्राप्त करने में UP की खास जिम्मेदारी, अन्य राज्य भी बनेंगे भागीदार

Medhaj News 27 Nov 17 , 06:01:37 Power and Infrastructure
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केंद्र सरकार के साल 2022 तक 175 गीगावाट अक्षय ऊर्जा के लक्ष्य को हासिल करने का लक्ष्य रखा है, जिसे पूरा करने में महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश अहम भूमिका निभाएंगे। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए सरकार ने खाका तैयार कर लिया है। सरकार के अनुसार, अक्षय ऊर्जा के लक्ष्य को इन दोनों राज्यों के बगैर हासिल नहीं किया जा सकता है। इसलिए आने वाले 5 सालों में उत्तर प्रदेश में 17 हजार मेगावाट अक्षय ऊर्जा पैदा करने की क्षमता विकसित करेगी।

उत्तर प्रदेश की होगी इतनी भागेदारी

सरकार की ओर से तय किए गए लक्ष्य में UP दूसरे नंबर पर होगा। साल 2021-22 तक उत्तर प्रदेश में 9,476 मेगावाट सौर ऊर्जा से बिजली पैदा की जाएगी और 7,201 मेगावाट अक्षय ऊर्जा अन्य स्त्रोतों से पैदा की जाएगी। इसके तहत केंद्र के 175 गीगावाट के लक्ष्य में UP की हिस्सेदारी 16,677 मेगावाट की होगी।

इन राज्यों की भी होगी भागेदारी

-           महाराष्ट्र में सबसे अधिक 21,305 मेगावाट अक्षय ऊर्जा क्षमता विकसित की जाएगी।

-           तमिलनाडु राज्य में 15,483 मेगावाट अक्षय ऊर्जा अत्पादन का लक्ष्य रखा गया है।

-           गुजरात 15,772 मेगावाट, दिल्ली में 5,410 मेगावाट, चंडीगढ़ में 274 मेगावाट बिजली अक्षय ऊर्जा से पैदा होगी।

-           सरकार के इस लक्ष्य में बिहार में 3,161 मेगावाट, झारखंड में 1,270मेगावाट और उत्तराखंड में 2,783 मेगावाट बिजली उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है।

-           अंडमान और निकोबार और लक्षद्वीप में सौर ऊर्जा के बजाय पवन ऊर्जा के उत्पादन में वृद्धि की जाएगी।

गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने पेरिस पर्यावरण समझौते को हासिल करने के लिए 2030 तक कुल बिजली उत्पादन का 40%  अक्षय ऊर्जा से पैदा करने का लक्ष्य रखा है।

 

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