बैकफुट पर आई योगी सरकार, बिजली निजीकरण का फैसला लिया वापस

medhaj news 6 Apr 18 , 06:01:38 Power and Infrastructure
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सरकार के बकफुट पर आते ही बिजली विभाग के अभियंताओं और कर्मचारियों में खुशी का माहौल पैदा हो गया। अभियंताओं का कहना है कि अब वे पूरे मनोयोग से बिजली आपूर्ति व्यवस्था दुरुस्त करने और विभागीय राजस्व बढ़ाने में जुट जायेंगे।प्रदेश के ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा, पावर कारपोरेशन के चेयरमैन और प्रमुख सचिव, ऊर्जा आलोक कुमार, पावर कारपोरेशन की प्रबंध निदेशक अरुणा यू और विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के संयोजक शैलेंद्र दुबे समेत प्रतिनिधिमंडल के मध्य गुरुवार को काफी देर तक निजीकरण के मुद्दे पर मंथन हुआ।



दोनों पक्षों ने निजीकरण के फायदे और नुकसान पर अपनी-अपनी राय व्यक्त की। बिजली संगठन के प्रतिनिधियों के आगे सरकार के सभी बिंदु बेकार साबित हुए और आखिरकार सरकार को निजीकरण के फैसले पर बैकफुट पर जाना पड़ गया।



ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा ने प्रतिनिधिमंडल को लिखित तौर पर आश्वासन दिया कि 5 शहरों और 7 जनपदों समेत प्रदेश के किसी भी जनपद का निजीकरण नहीं होगा। टेंडर प्रक्रिया को निरस्त किया जाता है। हालांकि उन्होंने यह जरूर कहा कि एक समिति बनाकर विभाग के राजस्व को बढ़ाने में सहायता ली जाएगी, जिस पर प्रतिनिधिमंडल ने सहमति जताई। दोनों पक्षों के बीच सहमति बनने के बाद विद्युत कर्मचारी संघर्ष समिति ने आंदोलन का फैसला वापस ले लिया है।



निजीकरण का फैसला वापस होने के बाद अभियंताओं का कहना है कि अब वह बिजली विभाग का राजस्व बढ़ाने पर पूरा ध्यान केंद्रित करेंगे। शहर की बिजली आपूर्ति व्यवस्था पर खास ध्यान देंगे। इसके अलावा अभी तक जो भी काम रुका हुआ था उसे गति दी जाएगी। बकाएदारों पर वसूली की कार्रवाई तेजी से शुरू की जाएगी। इसके अलावा नए कनेक्शन लेने वालों को कनेक्शन दिए जाएंगे। समय पर बिलिंग का कार्य पूरा कराया जाएगा, जिससे सरकार को लाभ हो।





 


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