वाराणसी फ्लाईओवर हादसा: गुनहगारों को मिलेगी सजा, टीम जांच में जुटी

Medhaj news 17 May 18,21:55:26 Science & Technology
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यूपी के वाराणसी में निर्माणाधीन फ्लाईओवर हादसे को लेकर उच्च स्तारीय टीम की जांच में कई लापरवाही सामने आयी है। इंजीनियर्स की घोर लापरवाही तो तकनीकी पहलू से भी कई खामियां बतायी गयी हैं। मुख्यमंत्री योगीआदित्याथ की बनाई तीन सदस्यी टीम ने वाराणसी हादसे के बाद मौका मुआयना किया और उन वजहों की गहनता से जांच किया जिनके चलते बीम गिर सकते हैं। फॉरेंसिक दल ने मौके से कई सैंपल व सूबूत भी इकट्ठा किये। कमेटी को एपीसी राज प्रताप सिंह लीड कर रहे हैं और उनके साथ सिंचाई विभाग के हेड भूपेंद्र शर्मा व जल निगम प्रबंध निदेशक राजेश मित्तल भी हैं। मुख्यमंत्री की ओर से इस कमेटी को जांचा पूरी कर रिपोर्ट देने के लिये 48 घंटे का समय दिया है।
बताया जा रहा है कि जांच टीम ने तकनीक में गड़बड़ी के साथ ही लापरवाही को भी कारण माना है। इके अलावा सुरक्षा मानकों की भी अनदेखी की गई। टीम जांच के हर बिंदू पर फोकस करते हुए अपनी रिपोर्ट तैयार करने में जुटी है। मौके पर पहुंची टीम ने वहां वीडियोग्राफी करायी, घटना स्थल के फोटो लिये गए, मौके से हर वह सबूत लिये गए जो हादसे की वजह जानने में मददगार हो सकते हैं। टीम अब सबूतों और प्रत्यक्षदर्शियों व अपनी तकनीकी जांच के विभिन्न बिन्दुओं की कड़ियों को जोड़कर निष्कर्ष पर पहुंच रिपोर्ट तैयार कर मुख्यमंत्री को सौंपेगा। फिलहाल जांच टीम के आने के बाद मुख्य रूप से पांच कारणों पर ज्यादा ध्यान दिया जा रहा है।

बीम का बेयरिंग का फेल होना
फ्लाई ओवर हादसे में बेयरिंग को लेकर सवाल उठाए गए हैं। बेयरिंग पिलर और बीम के बीच होता है। इसी से बीम को सरकाकर सही जगह पर ले जाकर लॉक कर दिया जाता है। जांच करने पहुंची टीम ने मीडिया से बातचीत में बेयरिंग की गुणवत्ता पर सवाल उठाए। बताया कि प्रथम दृष्टया बेयरिंग फेल होने की बात आ रही है। बेयरिंग की सही फिटिंग न होने के चलते पिलर्स नीचे आ गए ऐसा बताया गया। हालांकि आंधी के बाद शटरिंग न चेक किये जाने पर भी सवाल उठाए गए हैं।

क्रॉस बीम न डालना
मौके पर जांच करने पहुंची टीम ने घटना स्थल पर पाया कि पिलर्स को रोकने के लिये क्रॉस बीम नहीं बनाए गए थे। सीधे ही पांच बीम डाल दिया गया था। इन सभी बीम की आपस में इंटरलिंकिंग भी नहीं की गयी थी। अंदाजा लगाया जा रहा है कि इन्हीं कारणों से अचानक बेयरिंग हटाने पर एक बीम गिरी और इसके चलते दूसरी बीम भी गिर गयी।

गुणवक्ता पर प्रश्न चिन्ह
जांच टीम के सामने एक सवाल था कि आखिरकार जो दो बीम गिरी उसमें से एक बीम दो हिस्सों में कैये बंट गयी, यह कैसे हो गया ? टीम ने इसकी गहनता से जांच की। इसके लिये वहां कराए जा रहे कार्यों की क्वालिटी पर भी सवाल उठ रहे हैं, हालांकि अभी टीम ने क्वालिटी के मामले पर टीम कुछ बोलने के बजाय गहनता से जांच कर रही है। गुणवत्ता जांच के लिये नमूने किसी आईआईटी लैब में भेजे जाएंगे।

नियम की अनदेखी
जांच में नियमों की अनदेखी की बातें भी सामने आ रही हैं। टीम ने इस बात की पूरी पड़ताल किया कि जो काम हो रहा था उस में सभी मानक और नियमों का सही पालन किया जा रहा था या नहीं। नियमों की अनदेखी के कुछ सबूत भी मिले हैं। बताया गया है कि मौके पर रखे रजिस्टर पर मशीन से नंबर तक नहीं डाले गए थे, जो जरूरी होता है।

रूट डायवर्जन
हादसे के दौरान 18 लोगों की मौत और कईयों के घायल होने का कारण यह भी था कि पुल का अति संवेदनशील काम चल रहा था, बावजूद इसके वहां आवागमन लगातार जारी था। यदि रूट डायवर्जन होता और ट्रैफिक वहां न होता तो जान का नुकसान रोका जा सकता था। हालांकि रूट डायवर्जन क्यों नहीं हुआ इसको लेकर जिम्मेदारी एक दूसरे पर थोपने का काम हो रहा है। यातायात पुलिस और सेतु निगम इसके लिये एक दूसरे को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं।

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