‘16 दिसंबर’ निर्भया गैंगरेप की चौथी बरसी, हालात ज्यौं के त्यौं!

मेधज न्यूज 16 Dec 16,10:27:24 Special Story
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‘16 दिसंबर’ 2012 दिल्ली ही नहीं पूरे देश की एक ऐसी तारीख है, जिसने पूरे समाज को झकझोर कर रख दिया था। उस काली रात को आज चार साल हो गए हैं, लेकिन हालात ज्यौं के त्यौं हैं। हर दिन देश के अलग-अलग हिस्से से रेप की वारदातें सुनने को मिलती है।

हम बात करे रहे हैं ‘निर्भया गैंगरेप कांड’ की... जब यह दरिंगदी निर्भया के साथ हुई थी, तो पूरा देश गुस्से की आग में जल उठा था। सब निर्भया को इंसाफ दिलाने के लिए इंडिया गेट पर मार्च निकाल रहे थे... दिसंबर की कडकड़ाती सर्दी में पुलिस के डंडे व ठंड़े पानी की बौछारे भी खा रहे थे, सबको एक ही चीज चाहिए थी ‘इंसाफ’!

हालांकि, धीरे-धीरे लोग इस घटना को भूलते जा रहे हैं, जहां पहले कोर्ट में सुनवाई के दौरान हजारों लोगों की भीड़ लगा करती थी अब वहां 4 साल बाद गिने-चुने 10 लोग भी नहीं रहते। लोगों को निर्भाया की याद आती तो है, लेकिन केवल केस में नया मोड़ आने पर!

चलिए, निर्भया गैंगरेप कांड की चौथी बरसी पर एक बार फिर याद दिलाते हैं हैवानियत की वो काली रात...!

दिल्ली की हजारों लड़कियों में से एक थी वो, जिसे मीडिया ने नाम दिया था ‘निर्भया’! पैरा-मेडिकल की वो छात्रा दिल्ली की आम लड़कियों की तरह 16 दिसंबर की शाम को अपने दोस्त के साथ फिल्म देखकर मुनीरका से घर जा रही थी। घर जाने के लिए उसने एक प्राइवेट बस ली।

निर्भया व उसके दोस्त को क्या पता था, यह बस उनके साथ-साथ पूरे देश की को झंकझोर देगी।

उस बस में ज्यादा लोग सवार नहीं थे। बस में मौजूद 6 लोगों ने निर्भया के साथ छेड़छाड़ शुरू कर दी। उसके दोस्त ने जब उसे बचाने की कोशिश की, तो उन लोगों ने मारपीट शुरू कर दी और निर्भया को अपनी हवस का शिकार बनाने पर उतारू हो गए। उन दरिंदो की दरिंदगी यही नहीं खत्म हुईं, उन्होंने निर्भया को शारीरिक यातनाएं देनी शुरू कर दी और लोहे की रॉड उसके प्राइवेट पार्ट में डालकर हैवानियत की सारी हदें पार कर दी।

यह बस पूरी दिल्ली में घूमती रही, अंत में उन लोगों ने निर्भया और उसके दोस्त को दिल्ली की कड़कडाती सर्द रात में नग्न अवस्था में वसंत विहार इलाके के सड़क किनारे फेंक दिया।

उसी अवस्था में दोनों को दिल्ली के सरकारी अस्पताल सफदगजंग में भर्ती कराया गया। कुछ दिन तक निर्भया सफदरजंग में जिंदगी और मौत के बीच झूलती रही, हालत नाजुक होने पर उसे सिंगापुर रेफर कर दिया गया। सिंगापुर के माउंट एलिजाबेथ अस्पताल में इलाज के दौरान 29 दिसंबर को निर्भया ने अपनी आखिरी सांसे ली।

घटना के अगले दिन इस पूरी घटना पर प्रकाश मीडिया की कवरेज द्वारा डला। धीरे-धीरे पूरे देश में घटना के विरोध में गुस्सा देखने को मिला।

आरोपियों को कैसे ढुंढा-

इस घटना के दो दिन बाद उस वक्त के पुलिस कमिश्नर नीरज कुमार ने प्रैस कॉन्प्रेंस कर जानकारी दी कि बस ड्राइवर राम सिंह समेत चार अभियुक्तों को गिरफ्तार कर लिया गया है। उन्होंने बताया कि जिस बस में सामूहिक दुष्कर्म किया गया था, उस पर 'यादव' लिखा हुआ था और ये बस दक्षिण दिल्ली में आर.के पुरम सेक्टर-3 से बस बरामद की गई। सबूत मिटाने के लिए बस को धो दिया गया था।

वहीं बस ड्राइवर राम सिंह ने अपना अपराध स्वीकार कर लिया और उसकी निशानदेही पर बाकी दोषियों को पकड़ा गया।

4 साल बाद उन बलात्कारियों का क्या हुआ?

इस सभी बलात्कारियों में 1 किशोर था, जिसकी सुनवाई जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड में हुई। बोर्ड ने तीन साल के लिए उसे बाल सुधार गृह भेज दिया था, अब वो वहां से भी रिहा हो चुका है। वहीं 5 वयस्क आरोपियों को तिहाड़ जेल में बंद कर दिया गया और इनके खिलाफ अभी तक केस चल रहा है।

आपको बता दें, 5 आरोपियों में से 1 राम सिंह बस ड्राइवर ने 11 मार्च 2013 को तिहाड़ जेल में फांसी लगा ली थी।

12-14 सितंबर 2013 को 4 आरोपियों को विशेष अदालत ने फांसी की सजा सुनाई थी।

आज 4 साल बाद भी हालातों में जरा-सा भी सुधार देखने को नहीं मिला, एक नजर ताजा आंकड़ो पर-

नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़ो के मुताबिक 2015 में राजधानी दिल्ली में रोज 6 रेप के केस सामने आते हैं।

यह कुछ आंकड़े-

साल 2011 में रेप के 24,206 मामलें सामने आए।

साल 2012 में 24,923 रेप के मामलें सामने आएं।

साल 2013 में 33,707 रेप के मामले सामने आएं।

साल 2014 में आंकड़ों में इजाफा देखते हुए 37,000 मामले सामने आएं।

साल 2015 में 34,651 रेप के मामले दर्ज किए गए।

 

 

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