बुद्ध पूर्णिमा: भगवान बुद्ध के अनमोल विचारों के साथ... जानें, क्यों मनाई जाती है बुद्ध पूर्णिमा...

मेधज न्यूज 10 May 17,15:55:08 Special Story
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आज बुद्ध पूर्णिमा का त्यौहार है, इस दिन पूरे देश में काफी हर्षो-उल्लास से यह त्यौहार मनाया जाता है। आज ही के दिन भगवान बुद्ध को बोद्ध वृक्ष के नीचे बुद्धत्व की प्राप्ति हुई थी और वे सिद्धार्थ गौतम से भगवान बुद्ध बन गए। इसी के साथ ऐसा माना जाता है कि बुद्ध भगवान विष्णु के नौवें अवतार हैं।

गौतम बुद्ध का जन्म 563 ईसा पूर्व – निर्वाण 483 ईसा पूर्व में हुआ था। उनकी माँ का नाम महामाया था जिनका सात दिन बाद निधन हुआ, उनका पालन महाप्रजापती गौतमी ने किया। सिद्धार्थ विवाहोपरांत एक मात्र प्रथम नवजात शिशु राहुल और पत्नी यशोधरा को त्यागकर संसार को जरा, मरण, दुखों से मुक्ति दिलाने के मार्ग की तलाश एवं सत्य दिव्य ज्ञान खोज में रात में राजपाठ छोड़कर जंगल चले गए।

वर्षों की कठोर साधना के पश्चात बोध गया (बिहार) में बोधी वृक्ष के नीचे उन्हें ज्ञान की प्राप्ति हुई और वे सिद्धार्थ गौतम से बुद्ध बन गए।  

विश्व महान दार्शनिक, वैज्ञानिक, धर्मगुरू एवं उच्च कोटी के समाज सुधारक थे। तथागत बुद्ध प्राचीनतम धर्मों में से एक महान बौद्ध धर्म के संस्थापक थे।

भगवान बुद्ध ने लोगों को मध्यम मार्ग का उपदेश किया। उन्होंने दुःख, उसके कारण और निवारण के लिए अष्टांगिक मार्ग सुझाया। उन्होंने अहिंसा पर बहुत जोर दिया है। उन्होंने यज्ञ और पशु-बलि की निंदा की।

यहां पढ़ें भगवान बुद्ध के महान विचार-

स्वस्थ्य सबसे बड़ा उपहार है, संतोष सबसे बड़ा धन है, वफ़ादारी सबसे बड़ा सम्बन्ध है।

अगर आप वाकई में अपने आप से प्रेम करते है,तो आप कभी भी दूसरों को दुःख नहीं पहुंचा सकते।

अच्छी चीजों के बारे में सोचें – हम वही बनते हैं जो हम सोचते हैं, इसलिए सकारात्मक बातें सोचें और खुश रहें।

अपना रास्ता स्वंय बनाएं– हम अकेले पैदा होते हैं और अकेले मृत्यु को प्राप्त होते हैं, इसलिए हमारे अलावा कोई और हमारी किस्मत का फैसला नहीं कर सकता।

खुशियों का कोई रास्ता नहीं, खुश रहना ही रास्ता है।

 

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