इंजीनियर्स डे स्पेशल: एक दौर में इंजीनियर होना था रूतबा... अब बना बेरोजगारी का प्रतिक

Medhaj News 15 Sep 17,15:40:06 Special Story
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आज देशभर में ‘इंजीनियर्स डे’ मनाया जा रहा है। महान भारतीय इंजीनियर भारत रत्न सर मोक्षगुंडम विश्वेश्वरय्या की याद में हर साल 15 सितंबर को भारत में ‘इंजीनियर डे’ मनाया जाता है। 15 सितंबर 1860 में सर विश्वेश्वरय्या का जन्म हुआ था। एम विश्वेश्वरय्या का जन्म 15 सितंबर 1860 को मैसूर (कर्नाटक) में हुआ था। विश्वेश्वरय्या के प्रयासों से ही कृष्णराजसागर बांध, भद्रावती आयरन एंड स्टील व‌र्क्स, मैसूर संदल ऑयल एंड सोप फैक्टरी, मैसूर विश्वविद्यालय, बैंक ऑफ मैसूर का निर्माण हो पाया।

विश्वेश्वरय्या के प्रयासों के कारण ही मैसूर विश्वविद्यालय की स्थापना हुई। 1955 में उन्हें सर्वोच्च भारतीय सम्मान ‘भारत रत्न’ से सम्मानित किया गया।

गौरतलब है कि भारत आईटी के क्षेत्र में दुनिया का अग्रणी देश है और इसलिए यहां आईटी इंजीनियर्स की भारी संख्या है।

एक दौर था, जब इंजीनियर होना एक रूतबा होता था, लेकिन अब आज के समय में कोई इंजीनियर की पढ़ाई का दिखता है, तो दूसरे लोग अपने आप ही अनुमान लगा लेते हैं कि इंजीनियरिंग की है तो बेरोजगार ही होगा।

ऑल इंडिया काउंसिल फॉर टेक्निकल एजुकेशन (AICTE) की मानें, तो भारतीय इंजीनियरिंग छात्र अब इतने खुशकिस्मत नहीं हैं। इंजीनियरिंग करने के बाद भी छात्र संतोषजनक नौकरी के लिए भटक रहे हैं। एक रिपोर्ट की मानें, तो देश के तमाम तकनीकी शिक्षा संस्थानों में इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने वाले करीब आठ लाख छात्रों में से 60 फीसदी हर साल बेरोजगार रह जाते हैं।

अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद् (AICTE) के हवाले से कहा गया है कि हर साल इंजीनियरिंग में स्नातक करने वाले कुल छात्रों में से महज 5 फीसदी छात्र इंटरर्नशिप ही कर पाते हैं।

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान यानी आईआईटी में दाखिला लेना हर किसी का सपना होता है। किसी समय बेहतर नौकरी की गारंटी माना जाता था आईआईटी में एडमिशन लेना। देशभर में तकरीबन 23 आईआईटी है, जिनमें करीब 75 हजार छात्र तकनीकी शिक्षा ले रहे हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार हर तीन में से एक आईआईटी ग्रेजुएट को कैंपस प्लेसमेंट यानी पढ़ाई पूरी करते ही संस्थान के माध्यम से नौकरी नहीं पाती।

हालांकि, सरकार इंजीनियरिंग की स्थित में सुधार की पूरी कोशिश कर रही है। मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने इसके लिए बाकायदा एक योजना तैयार की है। 

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