DNA फिंगरप्रिटिंग के जनक डॉ. लालजी सिंह का हुआ निधन

medhaj news 11 Dec 17,18:22:14 Special Story
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वाराणसी के काशी हिंदु विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति एंव डीएनए वैज्ञानिक डॉ. लालजी सिंह का 70 साल की उम्र में निधन हो गया है। डॉ. लालजी हैदराबाद के सेलुलर और आणविक जीव विज्ञान के पूर्व निदेशक भी रह चुके हैं। उनको डीएनए फिंगरप्रिटिंग का फादर भी कहा जाता है।
डॉ. लालजी जौनपुर के रहने वाले थे। उन्होंने बीएचयू के आईसीयू में उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन से बीएचयू परिसर और उनके गांव में शौक की लहर दौड़ गई।   


मिली जानकारी के अनुसार, वह तीन दिन पहले जौनपुर स्थित अपने गांव आए थे और हैदराबाद जा रहे थे। लेकिन वाराणसी के बाबतपुर एयरपोर्ट पर उन्हें दिल का दौरा पड़ा और उन्हें बीएचयू के सर सुंदरलाल अस्पताल में भर्ती कराया गया। लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका। बीएचयू के जनसंपर्क अधिकारी डॉ. राजेश सिंह ने बताया कि डॉ. लालजी सिंह का शव उनके गांव कलवारी ले जाया जाएगा। डा. लालजी सिंह अगस्त 2011 से अगस्त 2014 तक बीएचयू के कुलपति रहे।


भारत में पहली बार क्राइम इन्वेस्टिगेशन को 1988 में नई दिशा देने के लिए डीएनए फिंगर प्रिंट तकनीक को खोजा था। उन्हें इंड‍िया में डीएनए टेस्ट का जनक कहा जाता है। वे बचपन में पैदल 12 किलोमीटर चलकर वो रोज स्कूल जाते आते थे। उनके पिताजी साधारण किसान थे।

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