आखिर किसकी है आजादी- विचारधारा या सच्चाई

Medhaj News 14 Oct 17,23:22:27 Special Story
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भारत एक लोकतांत्रिक देश है। अगर हमारी विचारधारा और सोच खुद की मृत्यु का कारण बन जाए तो मन में बस एक ही सवाल उठता है कि आजादी है किसकी? भारत में विभिन्न विचारधाराओं के लोग रहते है। हर कोई किसी न किसी विचारधारा का समर्थन करता है, लेकिन 5 सितम्बर 2017 को पत्रकार गौरी लंकेश की हत्या कुछ और ही दर्शाती है। पत्रकार गौरी लंकेश की हत्या के पीछे लोग उनकी वामपंथी विचारधारा को मानते है। इस विचारधारा को मानने वाले अन्य पत्रकारों की भी हत्या कर दी गई थी। ऐसे में यह सवाल उठता है कि क्या विचारधारा के नाम पर विचारवादी एक- दूसरे की हत्या करेंगे?

क्या यही आधुनिक भारत है, इस प्रकार पत्रकारों की हत्या होना भारत में एक विचारधारा को स्थापित करने को दर्शाता है। सोशल मीडिया पर हर कोई किसी न किसी के बारे में लिखता रहता है... तो क्या इन सबकी भी हत्या कर दी जाएगी या फिर यह वामपंथी विचारधारा तक सीमित है।

बांग्लादेशी लेखिका तस्लीमा नसरीन हिन्दूत्व का समर्थन करती हैं, तो बांग्लादेशी लोग उन्हे मारना चाहते है। इसलिए ये भारत में रहती है और दक्षिणपंथी इनका समर्थन करते है लेकिन अगर तस्लीमा जी ने अपनी विचारधारा बदल दी तो क्या इनकी भी हत्या कर दी जाएगी?

कहते है समय बदलते देर नही लगती इसलिए समय के साथ बदल जाना चाहिए। गौरी लंकेश की हत्या की निंदा हर उस पत्रकार ने की है जिसके लिए पत्रकारिता करना पेशा नही, जिंदगी है। पत्रकारिता बदलाव की वह सीढ़ी है जो किसी विचारधारा का समर्थन नही करती। पत्रकार समाज का वो आईना होते है जिस पर समाज भरोसा करता है। जिसका काम सच्चाई को सामने रखना है उसे विचारधाराओं से जोडना सही नही।

मेरा मानना है कि जब भी कोई पत्रकार किसी नेता या धर्म के बारे में कुछ भी कहता है तो उसे घटना और तथ्यों से आंकना चाहिए न कि किसी विचारधारा से।

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