गुरू तेग बहादुर शहीद दिवस: हिंदू धर्म की रक्षा के लिए सिर झुकाया नहीं बल्कि कटवा दिया...

Medhaj News 24 Nov 17,17:03:43 Special Story
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सिख धर्म के 10वें गुरु, गुरु गोविंद सिंह जी के बारे में आपने बहुत सुना होगा लेकिन उनके पिता यानि सिख धर्म के 9वें गुरु, गुरु तेग बहादुर जी के बारे में जानना भी बेहद जरूरी है... गुरू तेग बहादुर के बलिदान को आज भी लोग शहीद दिवस के रूप में मनाते हैं। गुरू तेग बहादुर ने अपने धर्म और सम्मान के बचाव के लिए अपनी जान दे दी थी, उनके इसी बलिदान और शहादत की याद में 24 नवंबर को गुरु तेग बहादुर शहीदी दिवस मनाया जाता है।

गुरु तेग बहादुर जी का जन्म 1 अप्रैल, 1621 में अमृतसर में हुआ था। उन्होंने कश्मीरी पंडितो और अन्य हिन्दुओं को मुगलों द्वारा बलपूर्वक मुसलमान बनाने का विरोध किया और उन्होंने धर्म की रक्षा करते हुए अपने प्राणों की बिल्कुल भी चिंता नही की।  

24 नवम्बर, 1675 को मुग़ल शासक औरंगजेब ने गुरू तेग बहादुर को इस्लाम कबूल करने के लिए विवश किया... लेकिन उन्होंने इस्लाम कबूलने से मना कर दिया और बोला “शीश कटा सकते हैं, लेकिन केश नहीं” फिर क्या था, सबसे क्रूर मुगल शासक औरंगजेब ने उनका सिर कलम करवा दिया।

जहां पर गुरु तेग बहादुर जी का शीश गिरा था, वहा पर उनकी याद में गुरुद्वारा बनवाया गया और उस गुरुद्वारे का नाम ‘शीश गंज साहिब’ रखा गया। वहीं, जहां उनका अंतिम संस्कार किया गया था, वहां ‘रकाब गंज साहिब’ के नाम से दूसरा गुरुद्वारा बनवाया गया, जो हमें उनके द्वारा दिये गए बलिदान को याद दिलाता है।

गुरु तेग बहादुर जी ने धर्म के सत्य ज्ञान के प्रचार-प्रसार एवं लोक कल्याणकारी कार्य के लिए कई स्थानों का भ्रमण किया। इसी दौरान जब वह पटना गये हुए थे, तो उसी बीच 1666 में सिखों के दसवें गुरु, गुरु गोविन्द सिंह जी का जन्म हुआ, गुरु गोविन्द सिंह जी ही सिखों के आखिरी गुरु भी थे।

 

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