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भीड़ में भी तन्हां हूँ

Medhaj News 18 Dec 19,23:47:57 Special Story
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लड़ रहा हूँ जिंदगी की उस जंग से,

जहाँ जीत तो मेरी है,

मगर हासिल कुछ भी नहीं।



घिरा हूँ चारों दिशाओं से,

जहाँ भीड़ तो अपनी है,

मगर साथी कोई भी नहीं।



रोज़ निकलता हूँ उन्हीं रास्तों से,

जिन पर मिलते तो कई हैं,

मगर जानता कोई भी नहीं।



मेरी सिखाने के प्रयास अनवरत जारी हैं,

पर मुझे सुनते तो हजारों हैं,

मगर सीखता कोई भी नहीं।



बताता हूँ जिंदगी हकीकत की,

मग्न सब हो जाते हैं,

पर समझता कोई भी नहीं।



थोड़ा-थोड़ा जीत के भी हार जाता हूँ,

बदला हुआ दिखता तो है,

मगर बदलता कुछ भी नहीं।


--(प्रज्ञा शुक्ला)--


    Comments

    • Medhaj News
      Updated - 2019-12-19 04:10:45
      Commented by :Shashank kesarwani

      रमणीय


    • Medhaj News
      Updated - 2019-12-18 22:45:37
      Commented by :Swati Chaurasia

      A poem saying something true in sense


    • Medhaj News
      Updated - 2019-12-18 21:56:01
      Commented by :Bhawana Maurya

      Very well written Pragya....waiting for more to read


    • Medhaj News
      Updated - 2019-12-18 21:02:59
      Commented by :Manmohan Kumar

      nice story, i like it.


    • Medhaj News
      Updated - 2019-12-18 20:00:06
      Commented by :Kaushiki

      True


    • Medhaj News
      Updated - 2019-12-18 19:47:56
      Commented by :Himanshu Singh

      Truth line of life


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