31 अक्टूबर 1984 स्पेशल: इंदिरा को बचाने के लिए चढ़ाई गईं थी 80 खून की बोतलें...

Medhaj News 31 Oct 17,16:13:05 Special Story
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भारतीय इतिहात का आज काफी अहम दिन है 31 अक्टूबर... 31 अक्टूबर 1984 यह वो तारीख है जब भारत की तत्कालिन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की उनकी सुरक्षा में तैनात गार्ड ने गोली मारकर हत्या कर दी थी। इसके बाद 1984 के दंगों ने जन्म लिया, जिसमें न जाने कितने बेगुनहा लोगों ने अपनी जान देकर इंदिरा गांधी की मौत पर अपनी बली दी।

क्या हुआ उस दिन-

31 अक्टूबर को इंदिरा गांधी का आइरिस डायरेक्टर पीटर के उस्तीनोव के साथ इंटरव्यू था। इंदिरा गांधी पर डॉक्यूमेंट्री बनाने की तैयारी चल रही थी। सुबह तकरीबन 9 बजे इंदिरा गांधी एक अकबर रोड़ की तरफ चल पड़ी। जब इंदिरा गांधी उस गेट से करीब 11 फुट दूर पहुंची थी, उस गेट पर सब इंस्पेक्टर बेअंत सिंह तैनात था। वहीं पास में संतरी बूथ में कॉन्स्टेबल सतवंत सिंह स्टेनगन के लिए खड़ा था। जैसे ही इंदिरा गांधी वहां पहुंची तो अचानक बेअंत ने अपनी 0.38 बोर की सरकारी रिवॉल्वर निकालकर इंदिरा गांधी पर एक के बाद एक तीन गोलियां दाग दी। इन तीनों गोलियों से इंदिरा गांधी जमीन पर गिर गई। वहां से पांच फुट दूरी पर खड़े सतवंत सिंह टॉमसन ऑटोमैटिक कारबाइन के साथ खड़ा था। सतवंत ने कारबाइन से 25 गोलियां इंदिरा गांधी के शरीर पर दाग डाली। इन गोलियों से इंदिरा गांधी का शरीर छलनी हो गया था।

तुरंत उन्हें दिल्ली के अस्पताल एम्स भर्ती करा गया, 12 डॉक्टरों की टीम उन्हें बचाने में लग गई। यह गोलियां फेफड़ों व रीढ़ की हड्डी में धंस चुकी थी। बस उनका दिल सलामत था। बताया जाता है कि उन्हें 88 बोतल खून चढ़ाया गया, लेकिन फिर भी उनको बताया नहीं गया।

दोपहर 2.30 बजे हो गई थी मौत, लेकिन घोषणा हुई शाम 6 बजे

गोली लगने के 2 घंटे बाद 2 बजकर 23 मिनट पर इंदिरा गांधी को मृत घोषित कर दिया गया। हालांकि अधिकारिक घोषणा शाम को 6 बजे की गई।

गार्डों ने लिया ऑपरेशन ब्लूस्टार का बदला-

बअंत और सतवंत नाम के सुरक्षा गार्ड ने इंदिरा गांधी पर हमला इसलिए किया क्योंकि वह ऑपरेशन ब्लू स्टार का बदला लेना चाहते थे। बता दें, 3 से 6 जून 1984 को अमृतसर (पंजाब, भारत) स्थित हरिमंदिर साहिब परिसर को ख़ालिस्तान समर्थक जनरैल सिंह भिंडरावाले और उनके समर्थकों से मुक्त कराने के लिए चलाया गया अभियान था। पंजाब में भिंडरावाले के नेतृत्व में अलगाववादी ताकतें सशक्त हो रही थीं जिन्हें पाकिस्तान से समर्थन मिल रहा था। वह आतंकी गुरूद्वारे में छुप गए थे। तत्कालिन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने आदेश दिया कि स्वर्ण मंदिर परिसर को चारो ओर से घेर लिया जाए। चार जून को सेना ने परिसर में गोलीबारी की। भीषण खून-खराबे के कारण अकाल तख्त बुरी तरह से तबाह हो गया था। इस कार्रवाई से सिख समुदाय की भवानाओं को बहुत ठेस पहुंची थी, इसी कारण वश सिख समुदाय के सुरक्षा गार्डो ने इंदिरा को मौत के घाट उतार दिया। 

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