राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस: 1998 सफल परमाणु परीक्षण, जिसने अमेरिका समेत सभी देशों को कर दिया हैरान

मेधज न्यूज  |  Special Story  |  11 May 17,11:24:53  |  
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11 मई को संपूर्ण भारत में ‘राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस’ (National Technology Day) मनाया जाता है। विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय देश में नवाचार और प्रौद्योगिकी क्षेत्र में अर्जित उपलब्धियों के उपलक्ष्य में प्रत्येक वर्ष 11 मई को राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस का आयोजन करता है। 11 मई, 1998 को भारत ने पोखरण (राजस्थान) में अपना दूसरा सफल परमाणु परीक्षण किया था। यह दिन हमारी प्रौद्योगिकी की ताकत को दर्शाता है।

इस दिन 11 मई से लेकर 13 मई तक भारत ने सफलतापूर्वक 3 परमाणु परीक्षण किए थे। यह परमाणु परीक्षण इतना धमाकेदार था कि आस-पास के लोगों के घरों में भी दरार आ गई थी, लेकिन भारत इस परीक्षण से परमाणु संपन्न देश बन गया। शायद यही खुशी थी, जिसकी वजह से घरों में आई दरार से भी लोग खुश थे।

भारत मे 11 व 13 मई को राजस्थान के पोखरण मे परमाणु परीक्षण कर सारे विश्व मे तहलका मचा दिया था। अब भारत भी परमाणु शक्तियों मे संपन्न है। इस परीक्षण के इन धमाको से सारा संसार चकीत रह गया। प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी 20 मई को बुद्ध-स्थल पहुंचे। वही प्रधानमंत्री ने देश को एक नया नारा दिया 'जय जवान-जय किसान-जय जय-विज्ञान'। सभी देशवासी प्रधानमंत्री के साथ-साथ गर्व से भर उठे। इन परीक्षण का असर परमाणु संपन्न देशो पर बहुत अधिक हुआ। अमरीका, रूस, फ्रांस, जापान और चीन आदि देशो ने भारत को आर्थिक सहायता न देने की धमकी भी दी। लेकिन भारत इन धमकियों के सामने नहीं झुका।   

अमेरिका को नहीं लगी भनक-

गौरतलब है कि 11 व 13 मई 1998 को भारत की ओर से किए गए परमाणु परीक्षण की अमेरिका जैसे शक्तिशाली देश को भनक तक नहीं लगी थी। इस बात का उसे आज भी अफसोस है। किस दिन किस तरह परमाणु परीक्षण करना है इसकी पूरी योजना डॉ एपीजे अब्दुल कलाम ने की थी। पूरे विश्व में परमाणु संयंत्रों और सैन्य गतिविधियों पर सैटेलाइट से निगरानी करने वाला अमेरिका उस समय हैरान रह गया था, जब उसे मालूम पड़ा कि भारतीय वैज्ञानिकों ने 11 मई व 13 मई को पोखरण में परमाणु परीक्षण किया है।

कैसे भटकाया अमेरिका का ध्यान-

भारत के इस परमाणु परीक्षण के लिए विश्व के सभी देश भारत के खिलाफ हो गए थे। अमेरिका ने आर्थिक सहायता देने को भी इंकार कर दिया। लेकिन भारत पीछे नहीं हटा। भारतीय सेना ने दूसरी रेंज में युद्धाभ्यास भी शुरू कर दिया। जिससे अमेरिका के जासूसी उपग्रहों का ध्यान उस तरफ चला गया और यहां वे परमाणु परीक्षण की तैयारी कर सके। इधर कलाम जानते थे कि जैसे ही सैन्य गतिविधियां दूसरे क्षेत्र में संचालित होंगी अमेरिका के जासूसी उपग्रह वहां अपनी चौकसी बढ़ा देगें। जैसे ही वह अपने मकसद में कामयाब हुए रात में उन्होंने पोखरण की मिट्टी के कलर का करीब 500 मीटर का तंबू वहां लगवा दिया। उसी के अंदर 45 डिग्री तापमान में वैज्ञानिक वहां सैन्य अधिकारियों के साथ पूरे ऑपरेशन को अंजाम तक पहुंचाया।

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