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सीख रही हूँ

Medhaj News 26 Jan 20,00:35:01 Special Story
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सीख रही हूँ प्रतिदिन,

जीवन जीने के नए तरीके;

मुस्कुरा कर ज़ख्मों को,

सहने के नए तरीके।

यहाँ हर एक की पसंद,

और फरमाइशें अलग हैं;

सीख रही हूँ प्रेम से 'नहीं',

कहने के कुछ तरीके।


उम्मीदें हैं कुछ अपनों की,

जो मेरी चाहतों पर भारी हैं;

सीख रही हूँ ऐसे अपनों से,

दूर रहने के कुछ तरीके।

अक्सर ही भरी भीड़ में,

तन्हा पाया है खुद को मैंने;

सीख रही हूँ अब एकांत में ही,

खुश रहने के कुछ तरीके


जीवन उलझनों का जाल है,

हर मोड़ पर नये समीकरण, नये सवाल है;

सीख रही हूँ बिना धैर्य खोये,

उनको हल करने के कुछ तरीके।

वर्तमान में बेचैन जिंदगी की वज़ह,

महत्वाकांक्षाओं का विस्तार है,

सीख रही हूँ उच्चाकांक्षाओं को,

सीमित रखने के कुछ तरीके।


सीख रही हूँ खुद के लिये ,

समय खर्च करने के कुछ तरीके;

सीख रही हूँ बेतकल्लुफी से,

खुलकर हँसने के कुछ तरीके।




---(भावना मौर्या)---


    Comments

    • Medhaj News
      Updated - 2020-01-27 10:14:07
      Commented by :Siraj

      Amazing!!!


    • Medhaj News
      Updated - 2020-01-27 09:36:52
      Commented by :Kaushiki Mishra

      Nyc lines..


    • Medhaj News
      Updated - 2020-01-26 19:00:21
      Commented by :Suman maurya

      Nice poem...


    • Medhaj News
      Updated - 2020-01-26 18:22:56
      Commented by :Pragya Shukla

      Beautiful poem


    • Medhaj News
      Updated - 2020-01-26 15:37:05
      Commented by :Bhavna Tiwari

      Simply Amazing Ma'am...


    • Medhaj News
      Updated - 2020-01-26 14:50:06
      Commented by :Lata maurya

      Nice lines


    • Medhaj News
      Updated - 2020-01-26 14:33:47
      Commented by :Rajeev Kumar

      Very nice lines.....


    • Medhaj News
      Updated - 2020-01-26 14:31:10
      Commented by :Brijesh

      Nice poem ma'am


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