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लिखता हूँ……

Medhaj News 1 Jan 20,21:07:34 Special Story
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मैं  पलटकर, एक किताब लिखता हूँ;,

मैं फिर से, एक ख्याल लिखता हूँ।


हिस्सों में, किस्सों को लिखता हूँ;

कुछ अपनी, तो कुछ दूसरों की लिखता हूँ।


तोड़ के, जोड़ के, एक कहानी लिखता हूँ;

थक जाता हूँ शाम को, तो सुबह को लिखता हूँ।


कुछ होश में, तो कुछ खुमारी में लिखता हूँ;

कुछ अनकही सी, तो कुछ अनसुनी सी लिखता हूँ।


लफ़्ज़ों को शब्दों में, पिरो के लिखता हूँ;

कुछ समझ के, तो कुछ बिना समझे ही लिखता हूँ।


कुछ फासलों को, दूरियों में बदलकर लिखता हूँ,

किसी लम्बी बात को छोटी करके लिखता हूँ,


लिखता हूँ बहुत सारे सवाल,

फिर उन सवालों के मतलब समझ के उनके जवाबों को लिखता हूँ।

मिलता-जुलता है मेरा ख्याल, हर किसी के ख्याल से;

औरों के ज़ज्बातों को भी सुन के लिखता हूँ।


कुछ अधूरी सी, तो कुछ पूरी सी लिखता हूँ;

जो मुकम्मल नहीं, वही एक बात बार-बार लिखता हूँ।


         --(प्रज्ञा शुक्ला)--


( फासला- Emotional Distance, दूरियां-Physical Distance)


    Comments

    • Medhaj News
      Updated - 2020-01-01 17:44:19
      Commented by :Upendra

      बेहतरीन


    • Medhaj News
      Updated - 2020-01-01 16:39:04
      Commented by :Deepak Nautiyal

      Superb lines


    • Medhaj News
      Updated - 2020-01-01 16:34:29
      Commented by :Siraj

      Amazing !!!


    • Medhaj News
      Updated - 2020-01-01 15:55:53
      Commented by :Bhawana Maurya

      Nice composition


    • Medhaj News
      Updated - 2020-01-01 15:50:05
      Commented by :Sneha Bajpai

      Very nice


    • Medhaj News
      Updated - 2020-01-01 15:49:02
      Commented by :Farheen khan

      Nice poem


    • Medhaj News
      Updated - 2020-01-01 15:48:09
      Commented by :Vinay

      Nice....


    • Medhaj News
      Updated - 2020-01-01 15:46:46
      Commented by :Gopal

      Really heart touching poems.


    • Medhaj News
      Updated - 2020-01-01 15:45:38
      Commented by :Harshita Srivastava

      Nice poem


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