ताजमहल का रंग पड़ रहा है पीला, मुल्तानी मिट्टी से चमकाने की कोशिश

medhaj news 8 Dec 17,18:22:37 Special Story
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दुनिया के सात अजुबों में से एक ताजमहल की खूबसूरती फीकी पड़ती जा रही है, जिसकों ‘मड-पैक थेरेपी’ (मुल्तानी मिट्‌टी) के जरिए पॉलिश किया जा रहा है। ताकि ताजमहल पहले की तरह चमक सके। सन् 1648 में बनी 240 फीट ऊंची और 17 एकड़ में फैली इस मुगलकालीन इमारत पर पहली बार ‘मड-पैक-थैरपी’ के जरिए पॉलिश किया जा रहा है। 

 
पिछले कुछ सालों से ताजमहल की सफेदी डीजल और जले हुए कचरे के धुंए के कारण कम हो रही थी। मड-पैक थेरेपी का काम 2015 में शुरू हुआ था जो कि लगभग 75% तक पूरा हो चुका है। इसके नवंबर 2018 तक पुरा होने की उम्मीद जताई जा रही है।


आईआईटी कानपुर और अमेरिकी यूनिवर्सिटी के रिसर्चर्स ने यह पाया कि इंडस्ट्रियल जोन की फैक्ट्रियों से निकलने वाले धुएं का असर ताजमहल पर इस कदर पड़ा कि इसका रंग पीला पड़ने लगा था। जिसके बाद सरकार हरकत में आई और ताजमहल की सफेदी वापस लाने का काम शुरू कर दिया।


गौरतलब है कि जिस थैरपी से ताजमहल का पीलापन हटाया जा रहा है। इसमें मुल्तानी मिट्टी का प्रयोग किया जाएगा। ताजमहल पर मिट्टी की पतली परत लगाकर उसे प्लास्टिक शीट से ढका जाएगा। ये परत ताजमहल के संगमरमर पर जमा ग्रीस और कार्बन सोख लेगी। बाद में पूरे ताजमहल को डिस्टल पानी से धोया जाएगा।

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