वक़्त की आंधी Motivational Story in Hindi

medhaj news 28 Mar 18,21:22:04 Special Story
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बहुत समय पहले की बात है एक गाँव में एक ईमानदार व्यापारी रहता था लेकिन व्यापार में घाटा होने के कारण वह काफी कंगाल हो गया था | व्यापारी की पत्नी क्रोधी स्वभाव की थी | वह हर वक्त बात बात पर व्यापारी से उलझती रहती थी | एक दिन व्यापारी कामकाज के सिलसिले में वो एक जमींदार के खेत पर गया | वहा पर जमींदार ने उसे गन्ने काटने का काम दे दिया | जब गन्ने पुरे कट गये तो जमींदार ने मजदूरी के बदले कुछ गन्ने व्यापारी को दे दिए |

व्यापारी गन्ने की गठरी लेकर अपने घर की तरफ रवाना हुआ | रास्ते में उसे कुछ बच्चे मिले | वो बच्चे व्यापारी की सरल प्रकृति को जानते थे | वो गन्ने मांगते गये और व्यापारी उन्हें एक एक बांटता गया | घर पहुचते पहुचते व्यापारी के पास केवल एक गन्ना शेष रह गया | हाथ में केवल एक गन्ना देखकर व्यापारी की पत्नी का कर्कश स्वाभाव ओर भी उग्र हो गया | जब व्यापारी की पत्नी ने केवल एक गन्ना लाने का कारण पूछा तो बड़ी सरलता से व्यापारी ने सारी बात अपनी पत्नी को बता दी |

झगड़ालू और गुस्सैल पत्नी ने वह गन्ना जोर से उसकी पीठ पर दे मारा | उसी समय गन्ने के दो टुकड़े हो गये | इस पर व्यापारी ने मुस्कुराते हुए कहा “देवीजी , तुमने ये बहुत अच्छा काम किया , जो गन्ने के दो टुकड़े कर दिए , वरना मै खुद ही इसके दो टुकड़े करने वाला था , इन दो टुकडो में से एक तुम ले लो और दूसरा मुझे दे दो , भगवान ने हमे जो थोडा बहुत कुछ दिया है उसे बांटकर ही खाना चाहिए ” |

अपने पति के मुख से ऐसी बात सुनकर वो झगड़ालू पत्नी मोम की तरह पिघल गयी और उसे अपने किये पर बहुत पछतावा हुआ | उसकी आँखों में आसू आ गये और वो बोली “सचमुच , आप देवता से भी बढकर हो , मै आपके महान विचारो को आज तक नही समझ सकी थी , दरअसल आप तो दया के सागर है ” |

व्यापारी ने अपनी पत्नी से कहा “इस जीवन के सफर में पैसा धुप छाँव की तरह है , मै फिर से व्यापार करूंगा और शीघ्र ही अच्छी दौलत भी कमा लूँगा | ” चंद दिनों बाद व्यापारी के बचपन का मित्र उसके पास आकर बोला “मै तुम्हारे साथ सांझे का व्यापार करना चाहता हु  तुम धन की चिंता मत करो , पूंजी मेरी और श्रम तुम्हारा , तुम्हारी इमानदारी पर मुझे पूरा विश्वास है  ,हमे व्यापार में अच्छी सफलता मिलेगी ” |

दोनों ने मिलकर सांझे का व्यापार किया और एक दिन उन्हें व्यापार में अच्छा मुनाफा हुआ | अपने वादे के मुताबिक मित्र ने व्यापारी को मुनाफे का आधा हिस्सा दे दिया और इस तरह कंगाल हुआ व्यापारी फिर से लखपति बन गया | इस कहानी से हमे दो शिक्षाए मिलती है पहले “मुसीबत में कभी भी संयम नही खोना चाहिए ” और दूसरा “वक़्त की आंधी कभी भी अपना रुख बदल सकती है ” |


 

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