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"क्या हूँ मैं?"

Medhaj News 31 Dec 18,16:59:14 Special Story
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न अमीर हूँ मैं, न गरीब हूँ मैं;



बस इंसानियत के थोड़ा करीब हूँ मैं।



जो लोग सच्चा होने के कारण ,भीड़ में भी अकेले होते हैं;



बस ऐसी ही एक खुशकिस्मत बदनसीब हूँ मैं।



 



हर पल हर घड़ी, कुछ अलग सोचती हूँ,



शायद इसीलिये दुनिया की नजरों में कुछ अजीब हूँ मैं,



किसी से बहुत दूर तो किसी के बहुत करीब हूँ मैं।



 



सब कुछ दिया है खुदा ने मुझे,



पर आज भी उनके दर पर खड़ी एक फकीर हूँ मैं;



कभी-कभी लगता है, मैं हूँ नफरत का ढेर,



पर कभी-कभी लगता है कि हर दिल अज़ीज हूँ मैं।



 



झूठी तारीफों के पुल मुझसे बाँधे नही जाते,



इसीलिए किसी-किसी के नज़र में बहुत बद्तमीज़ हूँ मैं।



कुछ लोगों के लिये मैं लाख बुरी ही सही,



पर किसी किस्मत वाले का नसीब हूँ मैं।



 



सब आते हैं इस ज़हान में कुछ मकसद लिये,



खुदा के द्वारा बनाया गया ताबीज़ हूँ मैं।



जो दिल में था वो सब कह गये हम



अगर बुरा लगे तो माफ करिएगा, नचीज़ हूँ मैं।



 



----- भावना मौर्य -----


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