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मुझ में तुम

Medhaj News 17 Mar 20,01:19:52 Special Story
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तुमने  हिस्सों  में  छोड़ा  है, मैंने बस किस्सों में ही छोड़ा है,

तुम अपनी कहते  हो, हम तुम्हारी ही कहते हैं।

तुम्हे  सुनानी  आती है, हमें निभानी भी  आती  है,

तुम मुड़ के नहीं देखते, हम हर मोड़ पे रुक के देखते हैं।


तुम  लफ्ज़ो  की  ज़्यादा  कहते  हो,

हम  तुम्हारी आँखों को सुनते हैं।

तुम  हँस  के  छुपा  लेते  हो,

हम  मुस्कुरा  के  समझ  लेते  हैं।


तुम  लिख  के  अधूरा  छोड़  देते  हो,

हम  अपने शब्दों को जोड़ के उसे पूरा कर देते हैं।

तुम  एक  अरसे  के  बाद  मिलते  हो,

हम एक  अरसे  तक  उस  तड़प  को  जीते  हैं।


बड़े  बेरुखी  से  कह  के  आंखे  झुका  लेते  हो,

हमारी ही  आँखों  में  रहते  हो  और  हमसे  ही  नज़रे  चुरा  लेते  हो ।

तुम्हे  मंज़िल  तक  पहुंचना  आता  है,

हमें  तो  तुम्हारे  कदमो  को  दोहराना  ही  आता  है।



----(प्रज्ञा शुक्ला)----


    Comments

    • Medhaj News
      Updated - 2020-03-26 05:14:59
      Commented by :wylfzme

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    • Medhaj News
      Updated - 2020-03-21 11:34:02
      Commented by :Bhawana Maurya

      Beautiful Lines!!


    • Medhaj News
      Updated - 2020-03-20 21:00:13
      Commented by :Manoj kumar

      Realy very nice poem


    • Medhaj News
      Updated - 2020-03-20 10:01:04
      Commented by :MD SAQUIB ANWAR

      Very nice,


    • Medhaj News
      Updated - 2020-03-20 09:59:27
      Commented by :Vartika Mishra

      Very Nice Poem.....


    • Medhaj News
      Updated - 2020-03-20 09:10:02
      Commented by :Manas Tripathi

      Wonderful Pragya


    • Medhaj News
      Updated - 2020-03-20 08:06:45
      Commented by :Gopal

      Really nice & heart touching poems.


    • Medhaj News
      Updated - 2020-03-20 07:20:38
      Commented by :Sakshi

      Very nyc poem pragya


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