एबी फाउंडेशन के तहत आयोजित वेबिनार में जैविक खेती के विषय में विस्तृत चर्चा की गई

एबी फाउंडेशन के आत्मनिर्भर एवं श्रेष्ठ भारत अभियान के तहत आयोजित वेबिनार में "फ्यूचर ऑफ ऑर्गेनिक फार्मिंग" विषय पर विस्तृत चर्चा की गई। इस कार्यक्रम में भारत के विभिन्न प्रांतों के विशिष्ट विशेषज्ञों ने अपने सुझाव तथा जानकारी को साझा किया, और बताया गया कि आने वाले समय में जैविक खेती एक मील का पत्थर साबित होगा। कार्यक्रम की शुरुआत में संस्था के मार्गदर्शक एवं वरिष्ठ पत्रकार श्री पदम पति शर्मा ने जहां विगत वर्षों के दौरान रासायनिक कृषि का विकास तथा आने वाले समय में जैविक कृषि की जरूरतों पर बल दिया वहीं संस्था के ट्रस्टी श्री चंद्रकांत मिश्रा ने ऑर्गेनिक खेती को आज की जरूरत बताया।

कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि के रूप में डॉ. प्रसनजीत बोस ने किसानों की आजादी तथा उनको एक बेहतर बैंकिंग सुविधा के साथ कैसे जोड़ा जाए इसकी आवश्यकता पर बल दिया तथा उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि किसानों को इंपावर कैसे किया जाए, इसके लिए मिनिस्ट्री ऑफ एग्रीकल्चर, मिनिस्ट्री ऑफ एचआरडी तथा एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी को साथ आने की अपील की ताकि वह अपने कार्यक्रम से किसानों को इंपावर कर सकें।



एबी फाउंडेशन के तहत आयोजित वेबिनार में जैविक खेती के विषय में विस्तृत चर्चा की गई



इस  कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में आईसीएआर के मुख्य वैज्ञानिक श्री  बालकृष्ण झा ने विस्तृत जानकारी के साथ रासायनिक खेती तथा जैविक खेती के अंतर के साथ-साथ आने वाले समय में जैविक खेती की आवश्यकताओं को अपने रिसर्च के माध्यम से उसकी प्रामाणिकता सिद्ध की। उन्होंने इसके लिए अपने द्वारा इंप्लीमेंट किए गए एक कार रोल मॉडल को भी प्रस्तुत किया जो कि खुद self-sustainable हो तथा प्रत्येक किसानों के लिए उपयोगी हो। दूसरे वक्ता युवा एवं सफल कृषि उडमी श्री राजीव रंजन ने जहां ऑर्गेनिक खेती का अच्छा मार्केट विकसित करने की आवश्यकता तथा किसानों की आमदनी बढ़ाने पर जोर दिया। उन्होंने खुद की विकसित आयुर्वेदिक उर्वरक खेती की भी जानकारी दी तथा आने वाले समय में ऑर्गेनिक खेती को बेहतरीन भविष्य बताया। 

कार्यक्रम में मॉडरेटर की सफल भूमिका का निर्वाहन श्री रवि पांडे जी ने किया गया, वही अंत में संस्था की ओर से धन्यवाद ज्ञापन में एडवोकेट श्री आनंद कुमार सिंह ने बताया कि भारत की कृषि भूमि जहां दुनिया में एक सर्वश्रेष्ठ भूमि मानी जाती है फिर भी यहां लगभग 11000 किसान प्रतिवर्ष आत्महत्या करने पर विवश हो जाते हैं। उन्होंने सरकारों द्वारा कदम उठाने की आवश्यकता  तथा किसानों के जीवन को बेहतर बनाने के लिए जैविक खेती के माध्यम से भारत को एक स्वस्थ और समृद्ध देश बनाने की वकालत की। इन्हीं संभावनाओं तथा विश्वास के साथ एक बेहतर भारतवर्ष के निर्माण की कामना करते हुए सारे वक्ताओं तथा गेस्ट के प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए कार्यक्रम को विराम दिया गया।   





 


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