सरहद-ए-निगेहबान

सरहद पर खड़ा, 

वो अपनी नींदें खो रहा है,

देश रहे सलामत,

इसलिए वो न सो रहा है;

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अहसासों का पिटारा, 

भर कर वो अपने सीने में,

होंठो पर लिए हँसी, 

पर दिल में वो रो रहा है;

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यादें तो उसे भी,

आती होंगी अपनों की,

पर जज्बातों को दबाये, 

वो खुद को भी खो रहा है;

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चाहता है वो इतना ही, 

कि लोग याद रखें उसकी कुर्बानियाँ,

एहसान फरामोशी की इस दुनिया में, 

उम्मीदें वो बो रहा है;

***

ऐसे सरहद के निगेहबानों को,

नमन है तहे दिल से,

क्योंकि वो जग रहे हैं,

इसलिये देश सुकून से जी रहा है।

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भारतीय सेना दिवस पर देश के पहरेदारों को कोटि-कोटि नमन!



--(भावना मौर्य)--


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