विराट के प्रेरणादायक शब्द हमेशा याद रहेगा- मयंक अग्रवाल

Medhajnews 10 Jan 19 , 06:01:39 Sports
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भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच खेली गई टेस्ट सीरीज भारतीय टीम ने 2-1 के अंतर से जीता और 1947-48 के बाद से 71 वर्षों में यह पहला मौका था जब भारत को ऑस्ट्रेलिया की जमीन पर टेस्ट सीरीज में जीत मिली है। इस टेस्ट सीरीज के बीच में बुलाये गए 27 वर्षीय मयंक अग्रवाल ने सीरीज के अंतिम दो टेस्ट में खेलकर अपनी छाप छोड़ी।  मयंक अग्रवाल अपनी यादगार डेब्यू सीरीज की यादें लेकर घर लौटे है। कर्नाटक के इस युवा बल्लेबाज ने एक न्यूज़ चैनल को दिये गए इंटरव्यू मे अपने इस दौरे से जुड़ी अपनी यादों को साझा किया। 



मयंक अग्रवाल ने कहा कि मैं बस भारतीय टीम का हिस्सा बनने को लेकर बहुत ही उत्सुक था। मैं ऐसी सीरीज का हिस्सा होने जा रहा था जो बेहद जुझारु ढंग से खेली जाती है और दोनों टीमें जिसके लिए लड़ाई लड़ती हैं। जब मैं यहां पहुंचा तो यह सीरीज 1-1 की बराबरी पर थी और मैं बस वहां मौजूद होने को लेकर सोच रहा था। 





भारतीय टीम की कैप मिलना बहुत अच्छा था लेकिन उस से भी ज्यादा मुझे जिस बात ने सबसे ज्यादा प्रभावित किया वह थे विराट के शब्द, उन्होंने कहा, 'टेस्ट डेब्यू करने के लिए यह बहुत बड़ी जगह है। बड़ी जगह है, बड़ा मौका है और यहां तुम अच्छा खेल दिखाकर बड़ा प्रभाव भी बना सकते हो। मयंक अग्रवाल ने कहा की मेरे डेब्यू से दो दिन पहले रवि शास्त्री सर ने मुझसे बात की थी। उन्होंने कहा, 'मयंक, तुम्हें तुम्हारा मौका मिलेगा। हमें पता है कि तुम कड़ी मेहनत करके यहां पहुंचे हो; तुमने रन किए हैं और जब तुम यहां खेलोगे तो ये चीजें तुम्हारे काम आएंगी। मेरा हर किसी ने सपॉर्ट किया और मुझे स्वीकार किया, तो बहुत अच्छा महसूस हुआ।' 



फिर मयंक अग्रवाल ने अपने दोस्त केएल राहुल के बारे में बात की उन्होंने कहा की हमने एकसाथ काफी क्रिकेट खेला है। राहुल टीम में पहले से ही मेरा बेस्ट फ्रेंड मौजूद था इससे मेरे लिए स्थितियां काफी ज्यादा सहज हो गईं। उन्होंने पूरा ख्याल रखा कि मैं सहज रहूं। जाहिर है जब आपके पास आपका बेस्ट फ्रेंड हो, तो आपकी वाइब्स और ऊर्जा शिखर पर पहुंच जाती हैं। जब हम वहां कॉफी के लिए बाहर गए और उन्होंने मेरे साथ बैठ कर बात की। मैंने उनसे सबसे पहले कंगारू बोलरों के बारे में पूछा। उन्होंने मुझे अपना अनुभव बताया। मैं यहां मैच देख रहा था, लेकिन मैं बिल्कुल ताजा जानकारी अपने बेस्ट फ्रेंड से जान रहा था, जो इस सीरीज में खेल रहा था। यह बहुत फायदेमंद था, जिससे मदद मिली। 



ईमानदारी से कहूं, तो मैं शुरुआत में नर्वस था। जब मैंने दो-तीन शॉट खेल लिए और फिर खेल जारी रखा, तो मैं परिस्थितियों के साथ सहज होता चला गया। मैं लगातार खुद से बात कर रहा था और खुद को यह बता रहा था, 'मैं यहां एक प्लान के साथ आया हूं और मुझे अपने प्लान पर ही खेलना है।' मैं बस यही सोच रहा था और किसी भी चीज के बारे में नहीं सोच रहा था। 



सभी लोगों ने मेरा पूरा साथ दिया और सपोर्ट किया जिसका नतीजा ये रहा कि मैं अच्छा खेल पाया और मेरी पारी देश के काम आई और हम लोग 71 साल बाद वहां सीरीज जीतने में कामयाब रहे।


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