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अंतर्द्वंद

Medhaj News 3 Dec 19 , 06:01:39 Sports
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जीती अगर अंतर्द्वंद की पीड़ा,तो देह मात्र रह जायेगा।

फिर न व्यथा होगी-न कथा होगी, सब धूं-धूं करके जल जायेगा।

आकाश तो जगमगायेगा, मगर भूमि पर कहीं अंधकार रह जायेगा।


समय का सफर है, समय के साथ गुज़र जायेगा।

थोड़ा सा हौसला हो,  तो जीवन एक और तजुर्बे से भर जायेगा।

यही वो प्रारब्ध है, जहां मन की ना मिले और मन- से न मिले,

सहन कर जाओ तो एक नया प्रारब्ध बन जायेगा।


जीती अगर अंतर्द्वंद की पीड़ा,तो......

तमस को रहना ही है और तमस को सहना ही है,

अंधकार को समझ लिया, तो ज्ञान खुद ब खुद आ जायेगा।


निश्चय ही हार कर राह बदलना आसान है,

मगर जो तप गया, तो बस उसी का मोल रह जायेगा।

संघर्ष हर किसी का अनमोल है,

मगर जो जीता नहीं और हारा नहीं, बस उसी का नाम दोहराया जायेगा।
----(प्रज्ञा शुक्ला)----



 


    Comments

    • Medhaj News
      Updated - 2019-12-03 16:49:08
      Commented by :Bhawana Maurya

      बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति


    • Medhaj News
      Updated - 2019-12-03 16:47:30
      Commented by :Akanksha Srivastava

      Very nice poem..!!


    • Medhaj News
      Updated - 2019-12-03 16:20:20
      Commented by :Pratima

      Motivational poem


    • Medhaj News
      Updated - 2019-12-03 16:20:10
      Commented by :Siraj

      Very well written !!!


    • Medhaj News
      Updated - 2019-12-03 16:13:23
      Commented by :Farheen khan

      Nice ma'am


    • Medhaj News
      Updated - 2019-12-03 16:12:53
      Commented by :????? ?????

      बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति


    • Medhaj News
      Updated - 2019-12-03 15:56:15
      Commented by :BHAVNA TIWARI

      Bahut hi gehre arth ki kavita.... Very well written


    • Medhaj News
      Updated - 2019-12-03 15:48:02
      Commented by :Vinay kumar

      Nice


    • Medhaj News
      Updated - 2019-12-03 15:43:57
      Commented by :Harshita Srivastava

      Nice poem


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