आशीष नेहरा की विदाई पर युवराज ने लिखा भावुक पोस्ट, लिखा...

Medhaj News 2 Nov 17 , 06:01:37 Sports
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आशीष नेहरा ने अपने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से बुधवार को अलविदा कह दिया है। बुधवार को उन्होंने अपने करियर का आखिरी मैच खेला। 18 साल 250 दिन तक टीम इंडिया के लिए अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेलने वाले आशीष नेहरा ने अपने करियर में कई बड़े मुकाम तो छुए ही लेकिन इसके साथ-साथ उन्होंने साथी खिलाड़ियों के बीच ऐसी छाप छोड़ी जिसका सभी सम्मान करते हैं। कल विराट कोहली ने उन्हें भावुक अलविदा किया।

आज युवराज सिंह ने आशीष नेहरा को विदाई देते हुए एक भावुक पोस्ट फेसबुक के जरिए उन्हें लिखी।

उन्होंने लिखा...

“Resilience of Mr Ashish Nehra’ अपने भाई आशू के बारे में पहली चीज यही कहूंगा कि वो एक बेहद ईमानदार इंसान हैं…वो दिल का बहुत साफ आदमी है। पब्लिक फिगर्स को कई पैरामीटर्स पर जज किया जाता है। अस मामले में आशू दो-टूक था और उसकी वजह से उसे परेशानी भी हुई। लेकिन मेरे लिए वह हमेशा आशू या नेहरा जी रहा, एक मजेदार इंसान जो ईमानदार था और कभी अपनी टीम को झुकने नहीं देता था।’ मैं अंडर 19 के दिनों में उससे मिला था। वह भज्‍जी के साथ कमरे में रहता था, मैं उससे मिलने गया तो एक दुबला, पतला लड़का देखा जो सीधा खड़ा भी नहीं हो पा रहा था। वह एक पल बैठता औ अगले ही पल स्‍ट्रेच करता या आंखें मटकाता। मुझे ये बड़ा मजेदार लगा। बाद में जब हम भारत के लिए खेले तो पता चला कि आशू सीधा खड़ा ही नहीं रह सकता है। सौरव गांगुली ने आशू को ‘पोपट’ नाम दिया था क्‍योंकि वह बात बहुत करता था। मतलब कि वह पानी के भीतर भी बात कर सकता है, ऊपर से वो मजेदार है। उसकी बॉडी लैंग्‍वेज ही ऐसी है कि मजा आ जाता है। अगर आप आशीष नेहरा के साथ हो तो आप का दिन खराब नहीं जा सकता। नो चांस, वो बंदा आपको हंसा-हंसा के गिरा देगा। मैं सोचा करता था कि 38 बरस की उम्र में इतनी चोटों और आपरेशन के बाद यह इतनी तेज गेंद डाल सकता है तो मैं 36 बरस की उम्र में बल्लेबाजी क्यों नहीं कर सकता. इसी से मुझे आज भी प्रेरणा मिलती है। आशु के 11 आपरेशन हो चुके हैं, लेकिन अपनी मेहनत और अच्छा खेलने की ललक से उसने वापसी की। विश्वकप 2003 के दौरान उसका टखना बुरी तरह से मुड़ गया था। वह इंग्लैंड के खिलाफ अगला मैच खेलने की स्थिति में नहीं था, लेकिन नेहरा जी ने कहा कि वह खेलना चाहते हैं। उसने अगले 72 घंटे में 30-40 बार अपने टखने पर बर्फ की सिकाई की और पेनकिलर खाये। उस मैच में उसने 23 रन देकर छह विकेट लिये और भारत ने इंग्लैंड को 82 रन से हराया। नेहरा बहुत बेबाक है वह बनावटी नहीं है। इसका उसने खामियाजा भी भुगता विश्वकप 2011 सेमीफाइनल में पाकिस्तान के खिलाफ उसने उम्दा गेंदबाजी की़ लेकिन घायल हो गया और फाइनल नहीं खेल सका। मैं जानता हूं कि ऐसी स्थिति में कई खिलाड़ी अपने में सिमट जाते या इसका रोना रोने लगते.। लेकिन वह हमेशा हंसता रहता और सभी की मदद को तत्पर रहता। मुंबई में श्रीलंका के खिलाफ फाइनल के दौरान वह ड्रिंक्स, टावेल वगैरह का इंतजाम कराता। बाहर वालों को यह गैर जरूरी बात लगेगी लेकिन टीम खेल में जब सीनियर खिलाड़ी इस तरह मदद करता है तो बहुत अच्छा लगता है। मेरे लिये यह जज्बाती पल है और उसके तथा उसके परिवार के लिये भी। मैं क्रिकेट का शुक्रगुजार हूं कि मुझे ऐसा सच्चा दोस्त दिया।”

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