सातवीं शताब्दी के महाबलीपुरम मंदिर आज भी इन वजहों से है खास, जानिए क्यों...

Medhaj News 21 Oct 17,17:22:16 Tour
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1300 साल पहले बने महाबलीपुरम मंदिर पल्लव हिंदुओं राजाओं द्वारा बनाए गए थे। यहां के मंदिरों में प्राचीन स्थापत्य कला और वास्तुशिल्प के बेजोड़ नमूने है।

महाबलीपुरम का इतिहास

दक्षिण में पल्लव राजाओं का शासन लंबा रहा था, जो चौथी शताब्दी में महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु तक फैला। महाबलीपुरम तब बंदरगाह शहर के रूप में बसाया गया था, हालांकि आज इसका कोई नामोनिशान नही है। पल्लव राजाओं के वंश पर महाभारत काल का व्यापक प्रभाव था जिनकी झलक स्थापित मंदिरों में देखी जा सकती है। इन मंदिरों में पांडवों से जुडे स्थल और अवशेष आज भी मिलते है।

महाबलीपुरम मंदिर की खास विशेषताएं

-              इन मंदिरों में ग्रेनाइट पत्थरों का इस्तेमाल किया गया था, जिसके कारण ये मंदिर आज भी सुरक्षित है।

-              शोर टेंपल( तट मंदिर) वहां सबसे मशहूर है इसकी दो वजहें है- 1. भगवान विष्णु और शिव के मंदिर और 2. इस मंदिर को सुनामी भी तबाह नही कर सकती। 2001 में आई सुनामी ने तटीय क्षेत्रों में सब कुछ तबाह कर दिया था लेकिन इस मंदिर को कुछ नही हुआ।

-              इन मंदिरों में पांचों पांडवों के रथ और गुफाएं है। अर्जुन का तपस्या स्थल भी साथ में बना हुआ है।

-              कृष्ण भगवान के मक्खन के गोले के प्रतीक के रूप में पल्लव राजाओं ने कृष्णा बटर बॉल का निर्माण किया था। यह विशालकाय गोल पत्थर एक चट्टान पर टिका हुआ है। जो आज तक अपनी जगह से नही हिला है।

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